जिला _राजनांदगांव छत्तीसगढ़
विधा_गद्य आलेख
*संत गुरु घासीदास बाबा* दिनांक 18/12/ 2020
*प्रस्तावना_*_ गुरु घासीदास बाबा सतनाम पंथ के प्रवर्तक हैं। हमारे छत्तीसगढ़ में सतनाम पंथ को मानने वाले बहुतायत में सतनामी समाज है जो घासीदास बाबा के विचारों को अनुकरण करते हैं ।घासीदास बाबा सत्य के पुजारी थे और मानव धर्म का प्रचार करते थे। सतनाम पंथ के साथ-साथ अन्य पंथ के लोग भी घासीदास बाबा के विचारों को अनुकरण करते हुए आत्मसात करते हैं।
घासीदास बाबा का बहुत ही संदेश भरा विचार *मनखे मनखे एक बरोबर है।*
*जीवन परिचय __* बाबा गुरु घासीदास का जन्म छत्तीसगढ़ के रायपुर जिले में 18 दिसंबर 1756गिरौद नामक ग्राम में हुआ था। उनके पिता का नाम मंहगू दास तथा माता का नाम अमरौतिन था और उनकी धर्मपत्नी का सफुरा था।
*सामाजिक योगदान व संदेश*__
गुरु घासीदास छत्तीसगढ़ राज्य की संत परंपरा में सर्वोपरि हैं। बाल्याकाल से ही घासीदास के हृदय में वैराग्य का भाव प्रस्फुटित हो चुका था। समाज में व्याप्त पशुबलि तथा अन्य कुप्रथाओं का ये बचपन से ही विरोध करते रहे। समाज को नई दिशा प्रदान करने में इन्होंने अतुलनीय योगदान दिया था। सत्य से साक्षात्कार करना ही गुरु घासीदास के जीवन का परम लक्ष्य था।
इसी कारण घासीदास बाबा ने मानव को मानव से जोड़ने और सत्य का बोध कराने का संदेश दिया और लोगों को एकता सूत्र में बांधने का काम किए।
*सत्य वचन सप्त सिद्धांत* __
इनके सात वचन सतनाम पंथ के सप्त सिद्धांत के रूप में प्रतिष्ठित हैं, जिसमें सतनाम पर विश्वास, मूर्ति पूजा का निषेध, वर्ण भेद से परे, हिंसा का विरोध, व्यसन से मुक्ति, परस्त्रीगमन की वर्जना और दोपहर में खेत न जोतना हैं।
घासीदास बाबा के वचनों में संत शिरोमणि कबीर दास जी के शब्द समाहित है ।
*सामाजिक जागरण कार्य* ___
बाबा घासीदास का समाज में एक नई सोच और विचार उत्पन्न करने का बहुत बड़ा हाथ है। घासीदास जी बहुत कम उम्र से पशुओं की बलि, अन्य कुप्रथाओं जैसे जाती भेद-भाव, छुआ-छुत के विरोधी थे। गिरौदपुरी में जैतखाम भारत देश के अजूबों में से माना जा सकता है जहां लोग 18 दिसंबर के दिन भव्य मेला का आयोजन करते हैं। और घासीदास बाबा के विचारों को जन जन तक पहुंचाते हैं।
पद्मा साहू "पर्वणी"
खैरागढ़ राजनांदगांव छत्तीसगढ़
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