जिला - महासमुंद
राज्य - छत्तीसगढ़
विषय - रंगीन दुनिया
शीर्षक - क्या लिखूँ
अंतस मन से सोचती , लिख दूँ मैं क्याआज?
नजर जहाँ तक भेर लूँ , दिखते बिगड़े काज।।
टका - टका का लूट है , फैले भ्रष्टाचार ।
खून - खून पर कर रहा , बने निर्दयी वार ।।
सीमा की घटना लिखूँ , चले जहाँ तलवार।
पूतों के अर्थी तले , करती माँ चित्कार।।
हैं नारी के आबरू , लिख दूँ होते तार ।
या दुष्कर्मो का सजे , जगह-जगह बाजार।।
पेट जले है भूख से , बहे दूध की धार।
लावारिस फुटपाथ पर , सहे ठण्ड की मार।।
कहीं बिहाई बेटियाँ , जलती हैं ससुराल।
कहीं लोभियों का बजे ,मिली जुली करताल।।
अंधाधुन जंगल कटे , मेघ हुए बेहाल।
बादल बरसे है कहाँ , सुखे पड़े नद, ताल ।।
धुआं अम्बर चूमते , बन मोती का हार ।
शुद्ध हवा बिन जन सभी, सहे प्रदूषण मार।।
गरम - गरम है लू चले, सहते कानन पीर।
मोर पपीहा आँख से , बहा रहे हैं नीर।।
सारा जग मैं लिख चलूँ , पावन सुखद विचार।
सतरंगी आखर सजा , कर लेखन विस्तार।।
पुष्पा ग़जपाल पीहू
महासमुंद (छ. ग.)
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