Thursday, December 17, 2020

महासमुंद से पुष्पा गजपाल पीहू की रचना- क्या लिखूँ

नाम - पुष्पा गजपाल पीहू
जिला - महासमुंद
राज्य - छत्तीसगढ़
विषय - रंगीन दुनिया 
शीर्षक - क्या  लिखूँ

अंतस मन से सोचती  ,  लिख दूँ मैं  क्याआज?
नजर जहाँ तक भेर लूँ , दिखते बिगड़े काज।।

टका - टका  का लूट है , फैले   भ्रष्टाचार ।
खून - खून  पर कर रहा , बने निर्दयी वार ।।

सीमा  की घटना लिखूँ , चले जहाँ  तलवार।
पूतों   के  अर्थी   तले ,  करती माँ  चित्कार।।

हैं  नारी के  आबरू , लिख दूँ  होते  तार । 
या दुष्कर्मो का सजे , जगह-जगह बाजार।।

पेट  जले  है भूख से  , बहे दूध की धार।
लावारिस फुटपाथ पर , सहे  ठण्ड की मार।।

कहीं बिहाई बेटियाँ  , जलती हैं ससुराल।
कहीं लोभियों का बजे ,मिली जुली करताल।।

अंधाधुन  जंगल  कटे ,   मेघ  हुए  बेहाल।
बादल बरसे है कहाँ ,  सुखे पड़े नद, ताल ।।

धुआं अम्बर चूमते ,  बन मोती   का हार ।
शुद्ध हवा बिन जन सभी, सहे प्रदूषण मार।।

गरम - गरम है लू चले, सहते कानन पीर।
मोर पपीहा आँख से ,  बहा रहे हैं   नीर।।

सारा जग मैं लिख चलूँ , पावन सुखद विचार।
सतरंगी  आखर  सजा , कर लेखन विस्तार।।

पुष्पा ग़जपाल पीहू
महासमुंद (छ. ग.)

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