Thursday, December 17, 2020

बलौदाबाजार से संतराम कुम्हार की रचना- क्या होती है कविता

रचनाकार -  संतराम कुम्हार 
   जिला -  बलौदाबाजार (छ. ग.) 
     विधा - मुक्त कविता 
   शीर्षक - " क्या होती है कविता "
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मन में दबी भावनाओं को, 
अभिव्यक्त करने का साधन है। 
मन की कल्पना को यथार्थ रुप में, 
कलमबध्द करने का साधन है।।
          ईश्वर का जाप है कविता। 
          हरे हर संताप ये कविता।। 

समाज का ये दर्पण है।
सुधारात्मक प्रयास अर्पण है। 
सिखाता जिंदगी जीने के सलीखे ये, 
आत्मा में परमात्मा का दर्शन है।।
          सच्चाई की पुकार है कविता। 
          गरीब की गुहार है कविता।। 

प्रकृति से सबको मिलवाती है। 
भौंरे फूलों पर जब मंडराती है।
अलौकिक आनंद की अनुभूति देती, 
इंद्रधनुष जब आसमान पर छा जाती है।। 
          प्रकृति से लगाव है कविता। 
          भावों में भाव है कविता।। 

धरती का श्रृंगार कराती है। 
दुल्हन सा उसको सजाती है। 
कवि की अंत: पीड़ा को,
रो-रो के ये बतलाती है।। 
          खुशी की फुहार है कविता। 
          आँसू की धार है कविता।। 

वीरों की वीरगाथा सुनाती। 
इतिहास से हमें रुबरु कराती। 
राधा-कृष्ण की प्रेम की धून,
मन में भक्ति के दीप जलाती।। 
          आस्था से भरपूर है कविता। 
          भ्राँति करते दूर ये कविता।। 

मिट्टी की सुगंध भारत की आती है। 
शरहद पर जान जवान की जब जाती है।
बलिदान हो जाते देश पर ये, 
यादों में कुर्बानी बस रह जाती है।। 
         शहीदों की शहादत है कविता। 
          कवियों की अमानत है कविता।। 
               
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मौलिक रचना ( स्वरचित ) 
संतराम कुम्हार 
बलौदाबाजार (छ.ग.)

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