विषय-क्या होती है कविता ?
रचनाकर - सावित्री यादव"सावि"
बिलासपुर छ.ग.
शीर्षक -आत्मा की आवाज होती हैं कविता
आत्मा की आवाज होती हैं कविता |
दिल के टूटे तारो की साज होती है |
खुशी के मुस्कुराहट के पलो की गवाह होती हैं |
यादों को पन्नो पर उतारना ही हैं कविता
आत्मा की आवाज होती हैं कविता ||1||
हंसी खुशी के पलो को सँजोना हैं कविता |
आंखों में बसी उम्मीद होती है |
बिछड़े अपनो के दर्द को कहती है |
सपनो के तानो बानो से बनी होती हैं |
यादों का गुलदस्ता होती हैं कविता |
आत्मा की आवाज होती हैं कविता ||2|
और क्या बोलूँ एक पूरी जिंदगी के ,
किताब की आईना होती हैं कविता |
माँ की लोरी से लेकर पिता के प्यार सी एक प्यारी सी | गुदगुद्दी हंसी होती हैं कविता |
रूठना मनाना हर रंग लिए होती हैं कविता |
आत्मा की आवाज होती हैं कविता ||3||
प्रेम में डूबी प्रेयसी के प्रेम की पाती हैं कविता |
मिलने और बिछड़ने की साक्षी हैं कविता |
विरह में जलन और मिलन में खुशी काअहसास हैं कविता | आत्मा की आवाज होती हैं कविता ||4||
भक्ति के रंग में रँगे भक्त की आराधना होती हैं कविता |
विश्वास के साथ जीवन के रंगों से रंगी होती हैं |
पूजा के फ़ूल सी अरमानो की सुगन्ध होती हैं कविता |
आत्मा की आवाज होती हैं कविता ||5||
व्याख्या-कविता की व्याख्या की उसमे मन की भावनाएँ
और इच्छाओ का समावेश होता है|
रचनाकर सावित्री यादव "सावि"
बिलासपुर छ.ग.
No comments:
Post a Comment