संबलपुर,जिला-काँकेर,(छ. ग.)
विषय-क्या होती है कविता
दिनाँक-17.12.20
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*क्या होती है कविता*
भावों की प्रसव पीड़ा
उर में जब उठती है,।
नन्हा,कोमल,मृदुल,
शब्दों से नवजात
शिशु का जन्म होता है।
मन के समंदर से जब
लोग मोतियाँ निकालते है,
टूटते गहन अंधेरों में
भावों की पीड़ा
काव्य बन फूटती है।
नारी की उपेक्षा, बेटी की पीड़ा,
माँ के बुढ़ापे की व्यथा,
दुःखी, पीड़ित,शोषित की
लेखनी चलती है,
तब कविता जन्म लेती है।
वेदना को शब्दों को जोड़ लो,
उल्लास के वर्णों को बाँध लो,
प्रज्वलित मन में आस हो
तब कविता फूट पड़ती है।
दिल की धड़कन,
मन की तड़पन,
ना कर पाने की जलन,
अधर से जब शब्द ना फूट पड़े,
तब कविता कामिनी बल खाती है।
तिमिर कुटीर में उजास भरने वाला,
मरू में रिमझिम बरसने वाला,
सूखी निर्झरिणी की
कल-कल निनाद बन
कविता फूट पड़ती है।
*व्याख्या*-प्रस्तुत कविता में कविता किन-किन परिस्थितियों में जन्म
लेती है, इसे बताया गया है।
नलिनी बाजपेयी
संबलपुर,कांकेर, (छ.ग.)
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