जिला-कांकेर,छग
शीर्षक-योग्यता
विधा-कविता( मुक्त छंद)
योग्यता हमेशा जाने क्यों
भाग्यआजमाती है।
क्षमता होने पर भी किस्मत
यूं ही रुठ जाती है ।
सफलता की फाईल लिए
चल पड़ते हैं पग,
पर जाने क्यों मंजिल दूर
नजर आती है ।
कारवां मंजिल की तलाश में
चलती ही रहती है ।
योग्यता फाईल में ही बंद हो
खामोश सिसकती है ।
लाख बाधाएँ राह रोके फिर भी
योग्यता रंग लाती है,
मेघ हमेशा नहीं ढ़क पाते चमकते
सूरज को आसमां में।
मीराआर्ची चौहान
कांकेर,छग
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