Thursday, December 3, 2020

कांकेर से मीराआर्ची चौहान की रचना- योग्यता

रचयिता-मीराआर्ची चौहान
जिला-कांकेर,छग
शीर्षक-योग्यता
विधा-कविता( मुक्त छंद)

योग्यता हमेशा  जाने क्यों
 भाग्यआजमाती है।
क्षमता होने पर भी किस्मत
यूं ही रुठ जाती है ।

सफलता की फाईल लिए
चल पड़ते हैं  पग,
पर जाने क्यों मंजिल दूर
नजर आती है ।

 कारवां मंजिल की तलाश में
चलती ही रहती है ।
योग्यता फाईल में ही बंद  हो
खामोश सिसकती है ।

लाख बाधाएँ राह रोके फिर भी
योग्यता रंग लाती है,
मेघ हमेशा नहीं ढ़क पाते चमकते
 सूरज को आसमां में।

मीराआर्ची चौहान
कांकेर,छग
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