Saturday, December 19, 2020

कांकेर से नलिनी बाजपेयी की रचना- भूमि

रचनाकार-नलिनी बाजपेयी
     संबलपुर,जिला-काँकेर,(छ.ग.)
         विषय-भूमि,
    दिनाँक-19.12.20
*~~~~~~~~~~~~~~~*
             *भूमि*
धन्य-धन्य है मेरी 
पुण्य भारत भूमि
तुझको मेरा वन्दन हो,
अभिनन्दन।

सारे जहाँ से अच्छा 
हिन्दोस्तां हमारा,
दुनियाँ भर में खूबसूरत 
लागे चमन हमारा।

उत्तर में हिमालां,दक्षिण 
सागर  चरण पखारें,
पूरब में प्रभू जगन्नाथ, 
पश्चिम में द्वारिका धाम  तारें।

गंगा-जमुना की 
कल-कल करती धारा,
पहाड़ों,पर्वतों और 
मैदानों से लगता प्यारा।

ये मेरी जन्मभूमि। 
यही है कर्मभूमि हमारी,
रंग बिरंगी इसकी छटा 
निराली लगती सबसे प्यारी।

यहाँ के झरने ,
यहाँ की घनी अमराइयाँ,
खग कलरव संग 
कोयल कूकती पहाड़ियाँ।

मलयाचल से सुरभित 
यह स्वर्ण भूमि मतवाली,
राम कृष्ण की पावन भूमि है 
पुण्यभूमि बलशाली।

     नलिनी बाजपेयी
  संबलपुर,कांकेर,(छ.ग.)

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