रचनाकार-एच-एस-अरमो, अरमान ।
निवास-बायरन बाजार,रायपुर ।
जिला-रायपुर ,छत्तीसगढ़ ।
विषय-"भूमि " ।
विधा-छ्न्द मुक्त कविता ।
शीर्षक--"भूमि " ।
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====||••" भूमि " ••||====
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पंच तत्वों का एक तत्व ---
भूमि को दर्जा हासिल है ।
भगवान् शब्द का अर्थ में--
एक शब्द,प्रथम अक्षर --
भ-से-भूमि है नाम--।
भूमि बिन जीवन अधूरा--
वनस्पति व सभी जीवों का,
होता जीने का,आधार स्तंभ-।
भूमि -धरा -पृथ्वी-जन्मभूमि,
है कई इसके नाम--
किसान के लिए भूमि है,
माता के समान--।
देश के लिए सरहद--
भूमि,जल,नदी व पहाड़,
बन जाती है,उसकी पहचान ।
हर देशवासी को होता है--
प्रेम अपनी मातृभूमि से,
उसकी अखंडता के लिए,
मर-मिटता है व कहलाता बलिदान ।
विश्व में भूमि का क्षेत्र--
जल की तुलना में कम है,
कहीं मरुस्थल तो,कहीं पठार है,
तो कहीं पहाड़,नदिया व जंगल,
और जल सागर का है सैलाब--।
भूमि के उपजाऊपन और--
उपयोगिता ने,इसका मूल्य बढ़ाया है ।
सत्ता व परिवार में,
अक्सर होते रहते हैं,भूमि विवाद,
या भूमि का बँटवारा ,
जिसके पास होती है,
जितनी अधिक भूमि वह भूपति होता।
भूगर्भ में छिपे हुए हैं--
अनमोल खनिज सम्पदा और
खड़े हुए हैं,धरा पर भव्य इमारतें,
मंदिर-मस्जिद और गिरजाघर,
गुरुद्वारे हैं,धर्म स्थल न्यारे-न्यारे --।
आओ भूमि का कर्ज ,फर्ज--
राष्ट्रीय चेतना को जाग्रत कर,
पर्यावरण संरक्षण का महत्व,
जनसँख्या नियंत्रण करने का,
जनचेतना को आगे बढ़ायें--।
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व्याख्या--उपरोक्त रचना के माध्यम से यह कहना चाहता हूँ कि मानव जाति के लिए व सभी जीवों,वनस्पतियों में भूमि जीवन का आधार होतीहै ।यह बताने की कोशिश की है ।
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