जिला - बलौदाबाजार ( छ. ग. )
विषय - विवाह
विधा - छंद मुक्त कविता
शीर्षक - मेरी कन्या का विवाह
******************************
// मेरी कन्या का विवाह //
मन , मति या बुद्धि रूपी ,
कन्या है एक मेरी ।
जिनका प्रभु से प्रेम विवाह ,
करने की तैयारी ।।
बड़े यत्न से पाल - पोषकर ,
मैंने बड़ा किया है ।
धर्म नीति मर्यादा की ,
शिक्षा - संस्कार दिया है ।।
झूठ कपट छल बुराइयों से ,
किया बचाने का प्रयास ।
मेरी यह सुकुमारी कन्या ,
रहती सदैव मेरे पास ।।
शुद्ध पवित्र सुशील है ,
मायिक प्रपंच से दूर ।
सुंदर बड़ी सयानी हो गई ,
सरल स्वभाव मधुर ।।
प्रभु आप सा योग्य वर ,
और कहाँ से लाऊँ ।
मेरी कन्या को अपना लो ,
खुशी के ढोल बजाऊँ ।।
प्रभु धन्य हो जाऊँगा मैं ,
करके यह शुभ विवाह ।
जीवन सफल हो जाएगा ,
पूरी होगी मेरी हर चाह ।।
---#---#---#--
No comments:
Post a Comment