Tuesday, December 8, 2020

बलौदाबाजार से लीलाधर कुम्हार की रचना- विवाह

रचनाकार - लीलाधर कुम्हार
जिला - बलौदाबाजार ( छ. ग. )
विषय - विवाह
विधा - छंद मुक्त कविता
शीर्षक - मेरी कन्या का विवाह
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     // मेरी कन्या का विवाह //


मन , मति या बुद्धि रूपी ,
कन्या है एक मेरी ।
जिनका प्रभु से प्रेम विवाह ,
करने की तैयारी ।।

बड़े यत्न से पाल - पोषकर ,
मैंने बड़ा किया है ।
धर्म नीति मर्यादा की ,
 शिक्षा - संस्कार दिया है ।।

झूठ कपट छल बुराइयों से ,
किया बचाने का प्रयास ।
मेरी यह सुकुमारी कन्या ,
रहती सदैव मेरे पास ।।

शुद्ध पवित्र सुशील है ,
मायिक प्रपंच से दूर ।
सुंदर बड़ी सयानी हो गई ,
सरल स्वभाव मधुर ।।

प्रभु आप सा योग्य वर ,
और कहाँ से लाऊँ ।
मेरी कन्या को अपना लो ,
खुशी के ढोल बजाऊँ ।।

प्रभु धन्य हो जाऊँगा मैं ,
करके यह शुभ विवाह ।
जीवन सफल हो जाएगा ,
पूरी होगी मेरी हर चाह ।।

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