Tuesday, December 8, 2020

कांकेर से मीराआर्ची चौहान की रचना- विवाह

रचयिता-मीराआर्ची चौहान
जिला-कांकेर,छग
शीर्षक-विवाह
विधा-कविता (मुक्त छंद)

विवाह पवित्र बंधन जिसमें
दो अनजाने अजनबी साथ
चलते हैं अनवरत आजीवन|

जीवन के  सुख-दुःख सहकर
आशियाना बचाये रखते हुए,
ताउम्र साथ -साथ चलते हैं|

अब दहेज का दानव लील गया,
सभ्यता,संस्कृति व संस्कारों को,
 बांधे रखते थे रीति रिवाजों  से|

आओं विवाह की  पवित्र बेदी पर,
बेटी को बलिदान होने से बचाये
 व मानवता को लहुलुहान होने से|

मीराआर्ची चौहान
कांकेर,छग
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