जिला-कांकेर,छग
शीर्षक-विवाह
विधा-कविता (मुक्त छंद)
विवाह पवित्र बंधन जिसमें
दो अनजाने अजनबी साथ
चलते हैं अनवरत आजीवन|
जीवन के सुख-दुःख सहकर
आशियाना बचाये रखते हुए,
ताउम्र साथ -साथ चलते हैं|
अब दहेज का दानव लील गया,
सभ्यता,संस्कृति व संस्कारों को,
बांधे रखते थे रीति रिवाजों से|
आओं विवाह की पवित्र बेदी पर,
बेटी को बलिदान होने से बचाये
व मानवता को लहुलुहान होने से|
मीराआर्ची चौहान
कांकेर,छग
_____________________
No comments:
Post a Comment