Tuesday, December 8, 2020

कांकेर से नलिनी बाजपेयी की रचना- विवाह

रचनाकार-नलिनी बाजपेयी  
संबलपुर, जिला-कांकेर,(छ. ग.) विषय-विवाह,दिनाँक-08.12.20

   🌾🌷🌼विवाह🌼🌷🌾
*~~~~~~~~~~~~~~~~~~~*
सप्तपदी है 
जीवन का आधार,
सात वचनों से 
सपने होते साकार।

दो अंजाने 
दो सपन साथ हुए,
अलग घर-द्वार से चल  
दो सुमन एक हार हुए।

प्रेम के दो तार मिले, 
अंतर्मन अनुराग भरे,
अधरों का मृदु मुस्कान
सम्मोहन भरा सौगात बने।

सुखद स्वप्न ले 
बन सहचर,
सहचरी स्वर्ग सा 
घर निर्माण करें।

चांद से चांदनी 
सागर संग सरिता मिले,
नारायण संग लक्ष्मी, 
शिव गौरा राघव सिया संग मिले।

अलग देश अलग द्वार 
एक जिंदगी एक राह चले,
कल्पतरु और सुर वल्लरी 
स्वर्ग वाटिका को मदमस्त करे।

सूने ह्रदय पटल पर बन 
स्नेह सिंचित  फूल खिले,
तन,मन, धन जीवन अर्पण कर 
जग में समर्पण भाव भरे।

इन्हीं उपमाओं के संग
विवाह बेल खूब फूले फले।
जब तक सूरज चाँद रहे,
गंग-जमुन की धार रहे ।

दोनों के स्नेही जन परिजन 
परिणय मिलन के साक्ष्य बने ।
सब एक दूसरे के स्वजन बने,
मधुर मिलन चिरन्तन काल रहे।

सप्तपदी है 
जीवन का आधार,
सात वचनों से  
सपने होते साकार।

*व्याख्या*-प्रस्तुत कविता में मनुष्य के सोलह संस्कारों में से एक प्रमुख संस्कार  *विवाह* के बारे में बताया गया है।सप्तपदी विवाह का आधार होता है।
 
   नलिनी बाजपेयी
संबलपुर,कांकेर(छ.ग.)

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