जिला - बलौदाबाजार (छ. ग.)
विषय - ममता
विधा - छंद मुक्त कविता
शीर्षक - ममता
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// ममता //
व्यक्ति वस्तु परिस्थिति में ,
जो होता है मेरापन ।
वह ममता कहलाती है ,
जीवों का स्वाभाविक लक्षण ।।
माँ की ममता बालक पर ,
स्नेहमयी पोषण करती ।
नारी का यह ऐसा गुण ,
अद्भुत अनुकरणीय प्रकृति ।।
घर - परिवार की ममता में ,
पिता भी करते खूब कमाई ।
सुख - सुविधा जुटाने में ,
होती कभी भी नहीं ढिलाई ।।
गुरु की ममता अनोखी है ,
माया - मोह छुड़ाती ।
शिष्यों का करते कल्याण ,
भव से पार कराती ।।
ममता का अतिरेक जगत में ,
होते बंधन का कारण ।
लोभ कामना स्वार्थ से ,
दूषित होते ममता का आँचल ।।
संत - महापुरुषों की ममता ,
ईश्वर के प्रति होती है ।
ज्ञान भक्ति और मोक्ष प्रदायक ,
आत्मानन्द प्रकटाती है ।।
ममता अपने राम से ,
जग से सम व्यवहार ।
ममता का ऐसा सद्गुण ,
कर देती उद्धार ।।
ममता - ममता में अंतर ,
एक फँसाये एक उबारे ।
नश्वर में ममता घातक ,
शाश्वत में ममता ही तारे ।।
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