Monday, December 21, 2020

बलौदाबाजार से लीलाधर कुम्हार की रचना- ममता

रचनाकार - लीलाधर कुम्हार
जिला - बलौदाबाजार (छ. ग.)
विषय - ममता
विधा - छंद मुक्त कविता
शीर्षक - ममता
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             //  ममता  //

व्यक्ति वस्तु परिस्थिति में ,
जो होता है मेरापन ।
वह ममता कहलाती है ,
जीवों का स्वाभाविक लक्षण ।।

माँ की ममता बालक पर ,
स्नेहमयी पोषण करती ।
नारी का यह ऐसा गुण ,
अद्भुत अनुकरणीय प्रकृति ।।

घर - परिवार की ममता में ,
पिता भी करते खूब कमाई ।
सुख - सुविधा   जुटाने   में ,
होती कभी भी नहीं ढिलाई ।।

गुरु की ममता अनोखी है ,
माया - मोह छुड़ाती ।
शिष्यों का करते कल्याण ,
भव से पार कराती ।।

ममता का अतिरेक जगत में ,
होते बंधन का कारण ।
लोभ कामना स्वार्थ से ,
दूषित होते ममता का आँचल ।।

संत - महापुरुषों की ममता ,
ईश्वर के प्रति होती है ।
 ज्ञान भक्ति और मोक्ष प्रदायक ,
आत्मानन्द प्रकटाती है ।।

ममता अपने राम से ,
जग से सम व्यवहार ।
ममता का ऐसा सद्गुण ,
कर  देती  उद्धार ।।

ममता - ममता में अंतर ,
एक फँसाये एक उबारे ।
नश्वर में ममता घातक ,
शाश्वत में ममता ही तारे ।।

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