Friday, December 4, 2020

महासमुंद से विनोद कुमार "जोगी" की रचना- नजरिए का फेर

रचनाकार:- विनोद कुमार "जोगी"
जिला :- महासमुंद
विषय :- दृष्टिकोण
विधा :- कविता
शीर्षक :- नज़रिए का फेर

#######################

सहज लगे है काम किसी को,
कोई कहे आफत की ढ़ेर।
काम एक पर पक्ष भिन्न हैं,
है जोगी बस नज़रिए का फेर।

कड़वी लगे करेला किसी को,
कोई चाव से खाता है।
कभी किसी का प्रिय हो जाता,
कभी फूटी आंख ना सुहाता है।
तरकारी वहीं है जोगी,
बस मन में भावों का फेर।
स्वाद एक पर चाव भिन्न है,
है जोगी बस नज़रिए का फेर।

कहता कोई आधा भरा है,
कोई कहे जी आधा खाली।
आधा जल अरु आधा वायु भरा,
उत्तर अद्भुत बड़ी निराली।
पात्र वहीं है पानी भरा पर,
देखने व कहने का फेर।
दृश्य एक पर दिखता भिन्न है,
 है जोगी बस नज़रिए का फेर।
   
सहज लगे है काम किसी को,
कोई कहे आफत की ढ़ेर।
काम एक पर पक्ष भिन्न हैं,
है जोगी बस नज़रिए का फेर।  

#######################

व्याख्या :- उपरोक्त पंक्तियों में रचनाकार ने कहा है कि एक ही वस्तु को अगर हम भिन्न-भिन्न दृष्टिकोण से देखें तो उसकी उपयोगिता, उसका रंग रूप आदि भिन्न-भिन्न हो जाता है।

No comments:

Post a Comment

दुर्ग से प्रिया गुप्ता की रचना- चाहत

कवि-प्रिया गुप्ता जिला- दुर्ग राज्य-छत्तीसगढ़ शीर्षक-चाहत विधा-काव्य संपर्क-7974631528  दीवानगी दीवानों की वफ़ा है दोस्तो   काति...