Tuesday, December 1, 2020

राजनांदगांव से दूजराम साहू "अनन्य" की रचना-

रचनाकार - दूजराम साहू "अनन्य"
निवास - भरदाकला
तहसील - खैरागढ़ 
जिला - राजनांदगाँव (छ.ग.) 
       
      भाग जागे मोर भुंईया के 
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भाग जागे मोर भुंईया के , सरग बरोबर लागत हे ! 
पिऊरा लुगरा पहिरे  दाई, झुमर - झुमर के नाचत हे !! 

पड़की परेवना मैना मिट्ठू , गोड़ेला गुलछर्रा  उड़ावत हे ! 
फांफा झिंगरा टेटका  मेचका ,खुशी के गीत गावत हे !! 

फुरूर - फुरूर पुरवईया चले, दाई के अंचरा   डोलावत हे ! 
पबरीत माटी ये भुंईया के, महर - महर ममहावत हे !! 

जनम के अड़हा बेटा "अनन्य " , सेवा गजब बजावत हे !
सोन बरोबर धान देखके,  मन में खुशी मनावत हे !! 



शब्दार्थ :- गोड़ेला = गौरैया
            पबरीत = पावन/पवित्र 
            महर - महर = सुगंध 
            ममहाना = महकना !

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