निवास - भरदाकला
तहसील - खैरागढ़
जिला - राजनांदगाँव (छ.ग.)
भाग जागे मोर भुंईया के
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भाग जागे मोर भुंईया के , सरग बरोबर लागत हे !
पिऊरा लुगरा पहिरे दाई, झुमर - झुमर के नाचत हे !!
पड़की परेवना मैना मिट्ठू , गोड़ेला गुलछर्रा उड़ावत हे !
फांफा झिंगरा टेटका मेचका ,खुशी के गीत गावत हे !!
फुरूर - फुरूर पुरवईया चले, दाई के अंचरा डोलावत हे !
पबरीत माटी ये भुंईया के, महर - महर ममहावत हे !!
जनम के अड़हा बेटा "अनन्य " , सेवा गजब बजावत हे !
सोन बरोबर धान देखके, मन में खुशी मनावत हे !!
शब्दार्थ :- गोड़ेला = गौरैया
पबरीत = पावन/पवित्र
महर - महर = सुगंध
ममहाना = महकना !
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