Thursday, December 3, 2020

बलौदाबाजार से लीलाधर कुम्हार की रचना- योग्यता

रचनाकार - लीलाधर कुम्हार
जिला - बलौदाबाजार ( छ. ग. )
विषय -  योग्यता
विधा - कविता (शायरी )
शीर्षक - योग्यता
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            //  योग्यता  //

इस शहर में योग्यता की कदर होती है साहब ।
खोटे सिक्के चलते तो है पर छाप नही छोड़ पाते ।। १।।

कहीं भी जाओ कुछ भी करो योग्यता का मापदंड निश्चित है ।
अन्यथा एक अनपढ़ चरवाहा भी कॉलेज के प्रिंसिपल होते ।। २ ।।

संख्या और मात्रा नहीं क्वालिटी बिकता है इस बाजार में ।
पूछ - परख तो केवल योग्यता की ही होती है जनाब ।। ३ ।।

माना कि पद पैसा और सत्ता की तूती बोलती है ।
दिल से तो योग्यता वाले बचपन भी नवाजे जाते हैं ।। ४।।

झूठ छल कपट बेईमानी चंद दिनों का खेल है यारों ।
दुनिया पर राज करती है हमेशा योग्यता और ईमानदारी ।। ५ ।।

शेर की खाल ओढ़कर सियार कोई असली शेर नही हो जाता ।
कम से कम दहाड़ने और शिकार करने की योग्यता तो चाहिए ।। ६ ।।

ईश्वर को भी पाने के लिए मनुष्य होने की योग्यता आवश्यक है ।
और ऐसा दुर्लभ अवसर हम सबको मिला है मेरे भाई ।। ७ ।।

योग्यता वाले ही कुछ बनके और करके दिखाते हैं ।
नहीं तो समाज के कोने में ऊँघते हुए गुम हो जाते हैं लोग ।। ८ ।।

बहुजनहिताय - बहुजनसुखाय अपनी योग्यता को लगा दो ।
जीवन सार्थक , सफल और तृप्त हो जाएगा सेवा की मिठाई से ।। ९ ।।

जीवन और प्रकृति योग्यता बढ़ाने की पाठशाला है श्रीमान जी ।
होशियार और मेहनत वाले बाजी मार लेते हैं समझौता नही करते ।। १० ।।

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