जिला - बलौदाबाजार ( छ. ग. )
विषय - योग्यता
विधा - कविता (शायरी )
शीर्षक - योग्यता
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// योग्यता //
इस शहर में योग्यता की कदर होती है साहब ।
खोटे सिक्के चलते तो है पर छाप नही छोड़ पाते ।। १।।
कहीं भी जाओ कुछ भी करो योग्यता का मापदंड निश्चित है ।
अन्यथा एक अनपढ़ चरवाहा भी कॉलेज के प्रिंसिपल होते ।। २ ।।
संख्या और मात्रा नहीं क्वालिटी बिकता है इस बाजार में ।
पूछ - परख तो केवल योग्यता की ही होती है जनाब ।। ३ ।।
माना कि पद पैसा और सत्ता की तूती बोलती है ।
दिल से तो योग्यता वाले बचपन भी नवाजे जाते हैं ।। ४।।
झूठ छल कपट बेईमानी चंद दिनों का खेल है यारों ।
दुनिया पर राज करती है हमेशा योग्यता और ईमानदारी ।। ५ ।।
शेर की खाल ओढ़कर सियार कोई असली शेर नही हो जाता ।
कम से कम दहाड़ने और शिकार करने की योग्यता तो चाहिए ।। ६ ।।
ईश्वर को भी पाने के लिए मनुष्य होने की योग्यता आवश्यक है ।
और ऐसा दुर्लभ अवसर हम सबको मिला है मेरे भाई ।। ७ ।।
योग्यता वाले ही कुछ बनके और करके दिखाते हैं ।
नहीं तो समाज के कोने में ऊँघते हुए गुम हो जाते हैं लोग ।। ८ ।।
बहुजनहिताय - बहुजनसुखाय अपनी योग्यता को लगा दो ।
जीवन सार्थक , सफल और तृप्त हो जाएगा सेवा की मिठाई से ।। ९ ।।
जीवन और प्रकृति योग्यता बढ़ाने की पाठशाला है श्रीमान जी ।
होशियार और मेहनत वाले बाजी मार लेते हैं समझौता नही करते ।। १० ।।
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