स्थान---नवापाराखुर्द/ सक्ति
जिला --जांजगीर-चांपा/छत्तीसगढ़
विधा ----कविता/ आलेख
विषय--भूमि
शीर्षक---भारत की भूमि
भारत की भूमि अपनी जन्मभूमि,आओ इसका सम्मान करे
यही जन्म हुआ यही कर्म बने,नित इसका हम बखान करे ।
है स्वर्ग सदृश यहां जन्में है ईश, अपना भी जन्म होता रहे ।
न हो इसका विनाश रहे सुरक्षित, इसके दुश्मन रोता रहे ।
ईश्वर से यही करें प्रार्थना हम,जग में सदा गुणगान चले ।
धन से भरपूर जन से भरपूर, युगों-युगों तक बना रहे ।
जिसे जन्म मिले वो गुणी रहे,जो रक्षा में हरदम तना रहे ।
राम का आए समय कृष्ण का काल, ईश्वर ए वरदान मिले।
यही सुर्य रहे यही चन्द्र रहे , गंगा जमुना यही बहती रहे ।
यही चांदनी हो बादल वर्षा,अमरीत की धार बहती रहे ।
हिमालय सी शांति हो अटल, शांति का खूब खदान मिले ।
है यह कलियुग उसे भूल जाये, सतयुग का रंग बिखर जाए ।
किसी को जन्म से पछतावा नहो , ऐसा जीवन निखर जाए ।
लाभ ही लाभ हो हर हाथों में, कोई भी न नुकसान मिले ।
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