जिला - बलौदाबाजार (छ. ग.)
विधा - मुक्त कविता
शीर्षक - " मेरे लिए २०२० के मायने "
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खट्टी-मीठी यादों के साथ,
बहुत खास रहा दो हजार बीस।
अनुभवी हुए अनेकों अनुभवों से,
शुभ मंगलमय हो दो हजार इक्कीस।।
भीड़ भरी इस शहर में,
सुख-दुःख का मेला था।
कभी अपनों का साथ मिला,
कभी तन्हा अकेला था।।
मिले रास्ते में कई मुझको,
काँटों भरी राहें।
पुष्प-पथ से भी स्वागत हुआ,
फैलाये अपनी बाहें।।
कभी रेगिस्तान-सी चिलमिलाती धूप,
कभी फूलों की घाटी।
कभी बंजर-सी बेजान जिंदगी,
कभी कश्मीर की माटी।।
कुछ पाया कुछ खोया मैंने।
तूफानी नाव में बनकर मल्हार।
न हारी हिम्मत फिर भी कभी,
किया मुसीबतों का सागर पार।।
कोरोना की जब विपत्ति आई।
महामारी ने भी एक बात सिखाई।
अपनाओ भारतीय संस्कृति को,
हाथ जोड़ करो राम-राम रघुराई।।
मानव जाति पर जब संकट आई।
मिल जुलकर सभी ने लड़ी लड़ाई।
दिखाकर एकता का भाव सभी ने,
जागरुकता का प्रकाश फैलाई।।
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मौलिक रचना ( स्वरचित )
संतराम कुम्हार
बलौदाबाजार (छ.ग.)
Super
ReplyDeleteThank-you sir
DeleteBahot khub
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