Saturday, December 26, 2020

बलौदाबाजार से संतराम कुम्हार की रचना- वर्ष २०२०

रचनाकार -  संतराम कुम्हार 
   जिला -  बलौदाबाजार (छ. ग.) 
     विधा - मुक्त कविता 
   शीर्षक - " मेरे लिए २०२० के मायने " 
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खट्टी-मीठी यादों के साथ, 
बहुत खास रहा दो हजार बीस। 
अनुभवी हुए अनेकों अनुभवों से,
शुभ मंगलमय हो दो हजार इक्कीस।।

भीड़ भरी इस शहर में, 
सुख-दुःख का मेला था। 
कभी अपनों का साथ मिला, 
कभी तन्हा अकेला था।। 

मिले रास्ते में कई मुझको, 
काँटों भरी राहें। 
पुष्प-पथ से भी स्वागत हुआ,
फैलाये अपनी बाहें।। 

कभी रेगिस्तान-सी चिलमिलाती धूप, 
कभी फूलों की घाटी। 
कभी बंजर-सी बेजान जिंदगी, 
कभी कश्मीर की माटी।। 

कुछ पाया कुछ खोया मैंने।
तूफानी नाव में बनकर मल्हार। 
न हारी हिम्मत फिर भी कभी, 
किया मुसीबतों का सागर पार।। 

कोरोना की जब विपत्ति आई। 
महामारी ने भी एक बात सिखाई। 
अपनाओ भारतीय संस्कृति को, 
हाथ जोड़ करो राम-राम रघुराई।। 

मानव जाति पर जब संकट आई। 
मिल जुलकर सभी ने लड़ी लड़ाई। 
दिखाकर एकता का भाव सभी ने, 
जागरुकता का प्रकाश फैलाई।। 

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मौलिक रचना ( स्वरचित ) 
संतराम कुम्हार 
बलौदाबाजार (छ.ग.)

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