संबलपुर, जिला- कांकेर,(छ.ग.)
विषय-मेरे लिए दो हजार बीस
दिनाँक-26.12 20
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*दो हजार बीस*
पल बीते,दिन बीते
बीत गई रातें,
बीत गया दो हजार
बीस का वर्ष।
खट्टी मीठी यादों
का तोहफा दें,
कोरोना संक्रमण से
जूझती यादें।
ले देकर आ गया
माह दिसंबर,
खूबसूरत पलों का आस
लिए आनेवाला नववर्ष।
कोरोना की कडुवी यादें,
बिछड़ों का दर्द,
उद्योग धंधे,संग शिक्षा का
बदहाली वाला वर्ष।
महामारी की भयावह
यादें वो बातें,
आज मथकर हिय में देती
कितनी आघातें।
ना कभी देखा ना कभी
आया ऐसा पल,
नई जिंदगी की आस लिए
आने वाला है कल।
दो हजार बीस का वर्ष
याद रखेगी दुनियाँ सारी,
गम और खुशी,अच्छी- बुरी
यादों के बीच नए वर्ष की करें तैयारी।
नलिनी बाजपेयी
संबलपुर,कांकेर,( छ.ग.)
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