Monday, December 28, 2020

कांकेर से नलिनी बाजपेयी की रचना- चौपाल

रचनाकार-नलिनी बाजपेयी
संबलपुर, जिला-कांकेर, (छ. ग.)
        विषय-चौपाल,    
    दिनाँक-28.12.20
*~~~~~~~~~~~~~*
            *चौपाल*

वो बरगद की छाँव, 
वो चौपाल लगाता गाँव, 
वो प्यारा, सुंदर नीम
पीपल के नीचे फैला प्रेम भाव।

चौपाल में बैठते थे
जलाकर अलाव,
वो शिशिर की रातें जहाँ
होता लोगों का जमाव।

वो बातें,वो मुलाकातों में
आ गया है अजीब ठहराव,
आपस में सब भेद भरे,
सबका बदल गया स्वभाव।

सुख-दुख की बातें,
सुलझी होती थी रातें,
चौपाल को जाने किसकी
नजर लगी कोई नहीं बताते।

जहाँ जीवन का उल्लास
लहर लेता,वहाँ उदासी की घातें,
जहाँ सब गम भूल जाते,
वहाँ आने से  घबराते।

नया जमाना आया है, चौपाल ने  
रंगमंच का रूप है पाया,
मगर चौपालों का दर्द
बुजुर्गो के दिल में समाया।

व्याख्या-प्रस्तुत कविता में  विलुप्त होते चौपालों की व्यथा बताई गई है।

     नलिनी बाजपेयी
 संबलपुर,कांकेर,(छ.ग.)

No comments:

Post a Comment

दुर्ग से प्रिया गुप्ता की रचना- चाहत

कवि-प्रिया गुप्ता जिला- दुर्ग राज्य-छत्तीसगढ़ शीर्षक-चाहत विधा-काव्य संपर्क-7974631528  दीवानगी दीवानों की वफ़ा है दोस्तो   काति...