Monday, December 28, 2020

बलौदाबाजार से लीलाधर कुम्हार की रचना- चौपाल

रचनाकार - लीलाधर कुम्हार
जिला - बलौदाबाजार (छ. ग.)
विषय - चौपाल
विधा - मुक्त छंद ( छत्तीसगढ़ी )
शीर्षक - गाँव के चौपाल
******************************

         // गाँव के चौपाल //

चला - चला जाबो संगवारी गाँव के चौपाल मा ,
गुड़ी - बैठका होवत  हावय गाँव के चौपाल मा ,
नर - नारी सब लोगन आथे गाँव के चौपाल मा ,
नियाव - धरम के गोठ सुनबो गाँव के चौपाल मा ,
जिनगी के अनुभव मिलही  गाँव के चौपाल मा ।

मन के बात  गोठियाबो जी गाँव के चौपाल मा ,
सबके सुख - दुःख चर्चा होथे गाँव के चौपाल मा ,
कत्था जनउला  होथे संगी  गाँव के चौपाल मा ,
नेतागिरी  अड़बड़   भैया  गाँव   के चौपाल मा ,
दिल्ली तक के चरचा भारी गाँव के चौपाल मा ।

खेल तमाशा  जादू देखबो  गाँव के चौपाल मा ,
नाचा गम्मत घलो रात  भर गाँव के चौपाल मा ,
राम -  रमायन कीर्तन होथे गाँव के चौपाल मा ,
नाटक लील्ला भीड़ - भड़ाका गाँव के चौपाल मा ,
मोहल्ला कलास चलत हावय गाँव के चौपाल मा ।

पीपर बरगद नीम के छइहाँ गाँव के चौपाल मा ,
गाँव के देवता - धामी बिराजे गाँव के चौपाल मा ,
सबले जादा चहल - पहल हे गाँव के चौपाल मा ,
दुनिया भर के खबर सुन ले गाँव के चौपाल मा ,
डोकरा सियान जादा बइठते गाँव के चौपाल मा ।

आजकल  नई बइठे  कोनो गाँव के चौपाल मा ,
लइका पिचका जादा खेलथे गाँव के चौपाल मा ,
मँगता - मँगतीन डेरा  डारे  गाँव के चौपाल मा ,
कुकुर बछरू सोवत  रइथे  गाँव के चौपाल मा ,
गारी - गिल्ला  झगरा  होथे  गाँव के चौपाल मा ,

             ---#---#---#---

No comments:

Post a Comment

दुर्ग से प्रिया गुप्ता की रचना- चाहत

कवि-प्रिया गुप्ता जिला- दुर्ग राज्य-छत्तीसगढ़ शीर्षक-चाहत विधा-काव्य संपर्क-7974631528  दीवानगी दीवानों की वफ़ा है दोस्तो   काति...