जिला - बलौदाबाजार (छ. ग.)
विषय - चौपाल
विधा - मुक्त छंद ( छत्तीसगढ़ी )
शीर्षक - गाँव के चौपाल
******************************
// गाँव के चौपाल //
चला - चला जाबो संगवारी गाँव के चौपाल मा ,
गुड़ी - बैठका होवत हावय गाँव के चौपाल मा ,
नर - नारी सब लोगन आथे गाँव के चौपाल मा ,
नियाव - धरम के गोठ सुनबो गाँव के चौपाल मा ,
जिनगी के अनुभव मिलही गाँव के चौपाल मा ।
मन के बात गोठियाबो जी गाँव के चौपाल मा ,
सबके सुख - दुःख चर्चा होथे गाँव के चौपाल मा ,
कत्था जनउला होथे संगी गाँव के चौपाल मा ,
नेतागिरी अड़बड़ भैया गाँव के चौपाल मा ,
दिल्ली तक के चरचा भारी गाँव के चौपाल मा ।
खेल तमाशा जादू देखबो गाँव के चौपाल मा ,
नाचा गम्मत घलो रात भर गाँव के चौपाल मा ,
राम - रमायन कीर्तन होथे गाँव के चौपाल मा ,
नाटक लील्ला भीड़ - भड़ाका गाँव के चौपाल मा ,
मोहल्ला कलास चलत हावय गाँव के चौपाल मा ।
पीपर बरगद नीम के छइहाँ गाँव के चौपाल मा ,
गाँव के देवता - धामी बिराजे गाँव के चौपाल मा ,
सबले जादा चहल - पहल हे गाँव के चौपाल मा ,
दुनिया भर के खबर सुन ले गाँव के चौपाल मा ,
डोकरा सियान जादा बइठते गाँव के चौपाल मा ।
आजकल नई बइठे कोनो गाँव के चौपाल मा ,
लइका पिचका जादा खेलथे गाँव के चौपाल मा ,
मँगता - मँगतीन डेरा डारे गाँव के चौपाल मा ,
कुकुर बछरू सोवत रइथे गाँव के चौपाल मा ,
गारी - गिल्ला झगरा होथे गाँव के चौपाल मा ,
---#---#---#---
No comments:
Post a Comment