Thursday, December 24, 2020

कोरबा से गोमती सिंह की रचना- समय

रचनाकार ---गोमती सिंह 
विषय---समय 
विधा----कविता
शीर्षक-–---"   समय  "
                  ***********
मैं एक बहती दरिया हूँ 
बहना मेरा काम ,
बहता जाऊँ बहता जाऊँ
सोंचूँ न अंजाम ।
हाय ! विधाता ने क्यों मुझे 
रुकना.नहीं सिखाया 
मैं. उस वक्त रुकना चाहा ,
जब विधाता ने किसी वधु की उतारी शान ,
तब कहा विधि.ने -रूकना नहीं ! 
बहना तेरा  पहचान ।
उस वक्त भी मैं ठिठक जाता हूँ ; 
जब शहीद होते हैं. वीर जवान , 
तब भारत माता कहती हैं -
ऐ वक्त ! तुम ठिठको नहीं ,
मेरे गर्रभ मे भेजो ऐसे ही वीर जवान ,
जो मेरी रक्षा मे कुर्रबान कर दे ; 
अपनी आन , बान, और शान ।
तब मैंने ये तय किया -
मैं एक बहती दरिया हूँ ,
बहना मेरा काम ,
बहता जाऊँ बहता जाऊँ
सोंचूँ न अंजाम ।
       .।।इति ।।
         " गोमती. सिंह " 
       कोरबा छत्तीसगढ़

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