विषय---समय
विधा----कविता
शीर्षक-–---" समय "
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मैं एक बहती दरिया हूँ
बहना मेरा काम ,
बहता जाऊँ बहता जाऊँ
सोंचूँ न अंजाम ।
हाय ! विधाता ने क्यों मुझे
रुकना.नहीं सिखाया
मैं. उस वक्त रुकना चाहा ,
जब विधाता ने किसी वधु की उतारी शान ,
तब कहा विधि.ने -रूकना नहीं !
बहना तेरा पहचान ।
उस वक्त भी मैं ठिठक जाता हूँ ;
जब शहीद होते हैं. वीर जवान ,
तब भारत माता कहती हैं -
ऐ वक्त ! तुम ठिठको नहीं ,
मेरे गर्रभ मे भेजो ऐसे ही वीर जवान ,
जो मेरी रक्षा मे कुर्रबान कर दे ;
अपनी आन , बान, और शान ।
तब मैंने ये तय किया -
मैं एक बहती दरिया हूँ ,
बहना मेरा काम ,
बहता जाऊँ बहता जाऊँ
सोंचूँ न अंजाम ।
.।।इति ।।
" गोमती. सिंह "
कोरबा छत्तीसगढ़
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