जिला - बलौदाबाजार (छ. ग.)
विषय - मेरे लिए वर्ष 2020 के मायने
विधा - छंद मुक्त कविता
शीर्षक - मेरे लिए वर्ष 2020
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// मेरे लिए वर्ष 2020 //
मेरे लिए सन् दो हजार बीस ,
विष नही अमृत है ।
जो भी होता अच्छा है ,
प्रभु की इच्छा सशक्त है ।।
कोरोना से जूझ रहे सब ,
बेरोजगारी मँहगाई ।
संघर्ष भरा जीवन देखा ,
अमूल्य शिक्षा भी पाई ।।
भारतीय संस्कृति की महानता ,
कोरोना ने फिर समझाया ।
सादा जीवन प्राकृत ढंग से ,
आयुर्वेद का मान बढ़ाया ।।
जीवन कितना कीमती है ,
अनुभव मैंने कर लिया ।
मृत्यु के आगे मानव ,
बेबस और असहाय हुआ ।।
अपना कौन पराया कौन ,
अच्छे से पहचान गए ।
सबक मिला सन् बीस में ,
दुनिया की रीति जान गए ।।
कृत्रिम और विलासी जीवन ,
कुदरत के विपरीत है ।
अच्छे से जाना मैंने ,
फिजूलखर्ची अनुचित है ।।
घर - परिवार की देखभाल ,
धन से बड़ा स्वास्थ्य ।
ठोकर खाकर मैंने सीखा ,
और भी कितने रहस्य ।।
साहित्य लेखन के क्षेत्र में ,
मुझे मिली है खूब प्रगति ।
काव्य संसद में स्थान मिलना ,
मेरे लिए है उपलब्धि ।।
धर्म और अध्यात्म आज भी ,
होता है कितना आवश्यक ?
संत और भगवंत की महिमा ,
समझ लिया मैंने सम्यक ।।
सदैव सम और प्रसन्न रहना ,
सिखा दिया मुझको सन् बीस ।
बड़े बुजुर्गों और प्रभु का ,
लेते रहना है आशीष ।।
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