स्थान--नवापाराखुर्द/सक्ति
जिला -जांजगीर-चांपा/छत्तीसगढ़
विधा -कविता/आलेख
विषय-छत्तीसगढ़ के संत
शीर्षक-संत गुरु घासीदास बाबा के संदेश
धरा में सतनाम ,जगमगात हावय जी ।
बाबा के कृपा ,महमहात हावय जी ।
बाबा देवय जन जन,सत के संदेश ।
कोन गांव कोन शहर ,कोन देश विदेश ।
मानव सब समान,बतावत हावय जी ।
सत के धजा ल फहरा ले तैं संगी ।
दया मया सुमता,बगरा ले तैं संगी ।
सत बिना मनखे,डगमगात हावय जी ।
सत के भोजन करले,सत के पिले पानी ।
जिनगी ल अमर करे,सत के मितानी ।
सत वाला मनखे,दग दगात हावय जी ।
सत जेकर मन बसे, मानुष वोला मान ।
सत नहीं समझ लें, निर्जीव पथरा समान ।
सत म धरती बोझ सबके,उठावत हावय जी ।
No comments:
Post a Comment