जिला -दुर्ग (छ.ग.),
विषय -भूमि,
विधा-स्वतंत्र
भूमि हे ! मातृ तत्व सरल ,
दे जीवन हर जीव को l
कर रही है नित अर्थयुक्त ,
हर तन मन जन को ll
युग चाहे कोई भी आया,
शांत भाव ही दिखाया तूने l
बनकर साक्षी सुख दुख का,
अमिट चरित्र चित्रण कर्तृ ll
अब जो है या थे कभी कर्मरत ,
सब की बातें, कैसी भी रातें l
घटित हुए सीमाओं में तेरे,
महा धात्री प्रबल प्रत्यक्षा ll
नही खड़ा हो सके काल भी,
उसको कभी कोई देखा नही l
तू हर पल सब के साथ है,
प्रलय रोके अद्भुत ओजस्विता ll
So, nice amazing sir
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