जिला-कांकेर,छग
शीर्षक-शिक्षक
विधा-कविता( मुक्त छंद)
मिट्टी के माधो को जो
चन्द्रगुप्त बना जाते हैं ।
ऐसे ही शिक्षक जग में,
गुरु चाणक्य कहलाते हैं ।
भावुक नरेन्द्र देव को जो
विवेकानंद बना जाते हैं ।
ऐसे ही शिक्षक जग में,
गुरु परमहंस कहलाते हैं ।।
भीड़ में खड़े अर्जुन को जो
श्रेष्ठ धनुर्धर बना जाते हैं ।
ऐसे ही शिक्षक जग में,
गुरु द्रोणाचार्य कहलाते हैं ।
शिक्षक वह नहीं जो सिर्फ,
जो पाठों को ही दोहराते हैं ।
शिष्य के श्रेष्ठता को जाने ,
वही श्रेष्ठ गुरु कहलाते हैं ।।
मीराआर्ची चौहान
कांकेर,छग
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