Tuesday, December 1, 2020

कांकेर से मीरा आर्ची चौहान की रचना- शिक्षक

रचयिता-मीराआर्ची चौहान
जिला-कांकेर,छग
शीर्षक-शिक्षक
विधा-कविता( मुक्त छंद)

मिट्टी के माधो को जो
चन्द्रगुप्त बना जाते हैं ।
ऐसे ही शिक्षक जग में,
 गुरु चाणक्य कहलाते हैं ।

भावुक नरेन्द्र देव को जो
विवेकानंद बना जाते हैं ।
ऐसे ही शिक्षक जग में,
 गुरु परमहंस कहलाते हैं ।।

भीड़ में खड़े अर्जुन को जो
श्रेष्ठ धनुर्धर बना जाते हैं ।
ऐसे ही शिक्षक जग में,
गुरु द्रोणाचार्य कहलाते हैं ।

शिक्षक वह नहीं जो सिर्फ,
जो पाठों को ही दोहराते हैं ।
शिष्य के श्रेष्ठता को जाने ,
वही श्रेष्ठ गुरु कहलाते हैं ।।

मीराआर्ची चौहान
कांकेर,छग
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