Friday, December 18, 2020

राजनांदगांव से दूजराम साहू "अनन्य" की रचना- हे सत के पुजारी

रचनाकार :- दूजराम साहू "अनन्य"
स्थान :- भरदाकला (खैरागढ़) 
जिला :- राजनांदगाँव (छ.ग) 
विधा :- कविता/आलेख 
शीर्षक :- हे सत के पुजारी 

हे सत के पुजारी बाबा घासी l
हे सत के कहानी, बाबा घासी के जुबानी ll

अलख जगाये  बाबा जनम लेके आये l
सत के मारग बाबा सब ल लखाये ll
सत के झंडा लहराये बाबा घासी l

जात-पात छुआछूत सब ल भगाये l
मनखे - मनखे एके हरे ज्ञान बताये ll 
गुण भेद बताये बाबा घासी l

हिंसा झन करो सब जीव एक जानव l
मांस मंदिरा के सेवन झन करव ll
तेतो अहिंसा के पुजारी बाबा घासी l

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