स्थान :- भरदाकला (खैरागढ़)
जिला :- राजनांदगाँव (छ.ग)
विधा :- कविता/आलेख
शीर्षक :- हे सत के पुजारी
हे सत के पुजारी बाबा घासी l
हे सत के कहानी, बाबा घासी के जुबानी ll
अलख जगाये बाबा जनम लेके आये l
सत के मारग बाबा सब ल लखाये ll
सत के झंडा लहराये बाबा घासी l
जात-पात छुआछूत सब ल भगाये l
मनखे - मनखे एके हरे ज्ञान बताये ll
गुण भेद बताये बाबा घासी l
हिंसा झन करो सब जीव एक जानव l
मांस मंदिरा के सेवन झन करव ll
तेतो अहिंसा के पुजारी बाबा घासी l
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