जिला :- महासमुंद
विषय :- सूर्य की किरणें
विधा :- छंद मुक्त कविता
शीर्षक :- सूर्य किरण के आ जाने से
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सूर्य किरण के आ जाने से,
फैली नभ में सिंदूरी लाली।
मानो चित्रकार ने उड़ेली,
अरूणिम रंग की इक प्याली।
नभचर नभ में करते कलरव,
मधुरिम गीत सुनाते हैं।
सूर्य किरण की आभा पाकर,
सुन्दर सुमन खिल जाते हैं।
पाकर अतुलित किरणें सूरज की,
तृण - तृण ने श्रृंगार धरा।
नव ऊर्जा संचार हुआ और,
चमक उठी है पावन धरा।
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व्याख्या :- उपरोक्त पंक्तियों में रचनाकार ने सूर्योदय के मनोरम दृश्य को शब्दबद्ध करने का प्रयास किया है।
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