Friday, November 6, 2020

राजनांदगांव से श्रीमती पद्मा साहू "पर्वणी" की रचना- लक्ष्य

रचनाकार, श्रीमती पद्मा साहू "पर्वणी"
जिला राजनांदगांव ( छ,ग,)
विधा छंदमुक्त कविता
शीर्षक,,,  *लक्ष्य* 

लक्ष्य भेदने  को अर्जुन जैसे ,
रखो  मन  में  एकाग्रता ।।
बारंबार करने से प्रयास ,
अंत में मिलती है सफलता ।।
कर्ण और एकलव्य जैसे ,
केवल लक्ष्य का करो संधान।।
अनवरत कोशिश से मिलती है,  
 लक्षित मंजिल और सम्मान।।
 गिरकर उठना उठकर चलना,
 यही है परिश्रमी की पहचान।।
 मिल ना जाए लक्ष्य जब तक,  
 भाग्य छोड़ कर्म करते रहो ।।
 कर्म  से  ही  भाग्य  बनता ,
 यह  पल - पल  याद रखो ।।
 लक्ष्य  को  पाने  के  लिए ,
 बगुले  की  पैनी  दृष्टि  रखो।।
 मंजिल चुपके से कहेगी पा लो मुझे,
संयम, और दृढ़ इच्छाशक्ति रखो।।
भयभीत न  करो  मन  को,
मंजिल पाने आगे कदम रखो।।
एकाग्र चित्त होकर शूल पर,
कदम बढ़ाते चलो बढ़ते चलो।

स्वरचित
पद्मा साहू
खैरागढ़ छत्तीसगढ़

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