Friday, November 6, 2020

बलौदाबाजार से संतराम कुम्हार की रचना- लक्ष्य

रचनाकार -  संतराम कुम्हार 
   जिला -  बलौदाबाजार (छ. ग.) 
     विधा - मुक्त कविता 
   शीर्षक - " लक्ष्य "
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चाहे राह में आ जाये कितनी मुश्किलें, 
अडिग रहूँगा मैं अपने पथ पर। 
हवा चीरते कठिन मंजरों का, 
चलूँगा एक दिन विजयरथ पर।। 

उमंग है, तरंग है, 
माना रास्ते बेढंग है। 
जज्बा हो अगर कुछ कर गुजरने का, 
तो जीवन इंद्रधनुषी रंग है।। 
कर्मवीर! कर्म करने का शपथ कर। 
पसीने से वस्त्र, भले ही लथपथ कर।। 

विजय का विगुल बजाने, 
निकल पड़ा मैं इस जहान पर। 
हालातों से लड़ने, 
अपने सपनों के विमान पर।। 
पार मुसीबतों का सरहद कर। 
कड़वी जीवन को भी शहद कर।। 

लक्ष्य की तलाश में मैंने, 
न जाने कितनी ठोकरें खायी है। 
ऊँची-निची दरियों को परस्त कर, 
कश्मीर का दीदार पायी है।। 
तैयार प्रयासों का तू परिपथ कर। 
हौसलों के लपटों से अग्निपथ कर।। 

कसर न छोड़ना कोई भी मेहनत का, 
कोशिश भरपूर करना।
त्याग, समर्पण और आत्मविश्वास 
असफलता भी सहना।। 
सफलता की जिद और हठ कर। 
स्वयं से युद्ध, हे! कर्मशील कर्मठ कर।। 
                                             
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मौलिक रचना (स्वरचित) 
संतराम कुम्हार 
बलौदाबाजार (छ.ग.)

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