संबलपुर, जिला-कांकेर (छ. ग.)
विषय :- लक्ष्य
दिनाँक :-06.11.20
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*लक्ष्य*
मैं बटोही हूँ,पथ मेरा
आलोकित करते जाना,
तम से घिरा हुआ लक्ष्य
पथ प्रदर्शित करते जाना।
आशा,उम्मीदों का दीप जला
पथ पर बढ़ते जाना,
चाहे आएं कितनी विपदाएं,
लक्ष्य की ओर बढ़ते जाना।
जीवन का तम मिटा,पथ को
उजास से भरते जाना,
मंजिल पाना लक्ष्य मेरा,
लालसा को उत्कर्षित करते जाना।
कदम डगमगाएं
फिर भी बढ़ते जाना,
मुसाफिर हूँ नया
फिर भी राह गढ़ते जाना।
कंटकाकीर्ण हो पथ फिर भी
पानी सा ढलते जाना,
हार मिले या जीत
लक्ष्य की ओर बढ़ते जाना।
पर्वतों सा होकर अडिग
सागर की लहरों से लड़ते जाना,
चक्रव्यूह से घिरा हुआ
मगर अभिमन्यु से बढ़ते जाना।
मैं बटोही हूँ, पथ मेरा
आलोकित कर करते जाना,
तम से घिरा हुआ लक्ष्य
पथ प्रदर्शित करते जाना।
*व्याख्या*-प्रस्तुत कविता में लक्ष्य प्राप्ति
के लिए चाहे कितनी भी मुसीबत आएं
हमें बढ़ते जाने का संकेत दिया है।
नलिनी बाजपेयी
संबलपुर,कांकेर,(छ.ग.)
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