जिला-कांकेर,छग
शीर्षक-लक्ष्य
विधा-कविता (मुक्त छंद)
जब तक मिले न
लक्ष्य बटोही,
आगे बढ़ता चल,
मंजिल तेरा
पग चूमेगी,
आज नहीं
तो कल|
लक्ष्य साधा
अर्जुन ने था
श्रेष्ठ धनुर्धर
कहलाए|
एकलव्य ने
लक्ष्य भेदी
बाण चला कर
गुरु बिन
श्रेष्ठता सिद्ध
कर पाये|
असंभव भी
संभव हो जाता,
लक्ष्य अगर
निर्धारित हो|
द्वार उपलब्धि
के खुल जाते हैं,
लक्ष्य अगर,
संकल्पित हो|
मीराआार्ची चौहान
कांकेर,छग
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