Friday, November 6, 2020

कांकेर से मीरा आर्ची चौहान की रचना- लक्ष्य

रचयिता-मीराआार्ची चौहान
    जिला-कांकेर,छग
    शीर्षक-लक्ष्य
    विधा-कविता (मुक्त छंद)

जब तक मिले न 
लक्ष्य बटोही,
आगे बढ़ता चल,
मंजिल तेरा 
पग चूमेगी,
आज नहीं 
 तो कल|

लक्ष्य साधा 
अर्जुन ने था
श्रेष्ठ धनुर्धर
कहलाए|

एकलव्य ने
लक्ष्य भेदी
बाण चला कर
गुरु बिन 
श्रेष्ठता सिद्ध 
कर पाये|

असंभव भी
संभव हो जाता,
लक्ष्य अगर
निर्धारित हो|

द्वार उपलब्धि
के खुल जाते हैं,
लक्ष्य अगर,
संकल्पित  हो|

मीराआार्ची चौहान
कांकेर,छग

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