ग्राम- बुलाँकी
जिला -रायगढ़( छत्तीसगढ़ )
विधा -आलेख(स्वेच्छिक)
विषय-लक्ष्य
दिनाँक-६/११/२०२०
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*लक्ष्य*
लक्ष्य का तात्पर्य पाना और दिशा का तात्पर्य जाना अर्थात लक्ष्य को प्राप्त करने के लिए किस दिशा पर जाना चाहिए। लक्ष्य पता होने से ही दिशा तय होती है। बिना लक्ष्य के दिशा पर जाने से लक्ष्य प्राप्त नहीं होती है। कोई भी लक्ष्य प्राप्त करने के लिए सबसे पहले लक्ष्य निर्धारण करने की आवश्यकता होती है। बिना लक्ष्य के कार्य करने से सफलता नही मिलती है। जबकि कोई भी कार्य सफलता के लिए की जाती है। सफलता मिलने से ही मनुष्य संतुष्टि का अहसास करता है। अर्थात सुख को पाना होता है। मनुष्य सुबह से शाम तक और जन्म से मृत्यु तक जो भी समझ कर ,विचार व्यवहार ,कार्य करता है ,तो केवल संतुष्टि अर्थात सुख के अर्थ में ही करता है। भले ही निरंतर सुख संतुष्टि न मिले। लेकिन सुख के लिए ही व्यवहार कार्य किया जाता है। कार्य लक्ष्य तय होने से ही सफलता मिलती है। कार्य का लक्ष्य निर्धारण नहीं है तो सफलता नही मिलती है। अतः सफल होने के लिए लक्ष्य निर्धारण करना अति आवश्यक है। बिना लक्ष्य के कार्य करने से सफलता नहीं मिल पाता और असफल मनुष्य कभी भी संतुष्टि नहीं हो पाता। अतः संतुष्टि के साथ जीने के लिए पहले लक्ष्य तय करना होगा ।उसके बाद उसे अंजाम देने के लिए तीव्र इच्छा शक्ति के साथ क्रियान्वयन कार्य पूर्ण कर लक्ष्य तय करने से सफलता जरूर मिलती है ।अतः कोई भी कार्य करते समय लक्ष्य निर्धारण करना अर्थात क्या पाना चाहते हैं ,वह तय होने के बाद उसी दिशा में कार्य को अंजाम दिया जाना चाहिए, तभी लक्ष्य तक पहुंचा जा सकता है। लक्ष्य और दिशा विहीन मनुष्य कभी सफल नहीं हो सकता। अतः लक्ष्य और दिशा निर्धारित होने से ही लक्ष्य की प्राप्ति होती है़।
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उर्मिला सिदार रायगढ़ छत्तीसगढ़
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