पता-------- कसडोल, छत्तीसगढ़
विषय ---- भ्रष्टाचार की राजधानी
शीर्षक --- भ्रष्टाचार
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मेरे देश की , ये अजब कहानी है !
बात भले ही , कुछ पुरानी है !
कहलाती थी कभी , सोने की चिड़िया ,
पर आजकल भ्रष्टाचार की राजधानी है !
कितने मकान , कितने भवन ढह गये !
पुल - पुलिया ,बांध, सड़क बाढ़ में बह गये !
भला टिकता कैसे , ये निर्माण सब ,
फण्ड तो सारे , भ्रष्टाचार की भेंट चढ़ गये !
सरकार की घोषणा , तो महज़ जुबानी है !
मेरे देश की --------------------------------------
खाकी , सफेद हो , या कोई टोपीधारी !
सबका खून हो गया है भ्रष्टाचारी !
विकास की बातें तो होती है बाद में ,
पहले करते हैं , अपनी जेबें भारी !
अधिकारी भी अक्सर करते हैं मनमानी है !
मेरे देश की -------------------------------------
जनता के पैसे से , करते हैं अय्याशी !
बाबू , अधिकारी हो या चपरासी !
रिश्वत के पैसे का , जो न हुआ इंतजाम ,
कितने होनहारों ने , लगा ली फांसी !
भ्रष्टाचार में ये , कैसी कुर्बानी है !
मेरे देश की ------------------------------------
रिश्वत खोरी , भ्रष्टाचार को भगाना होगा !
देश को फिर से , सोनचिरैया बनाना होगा !
सत्य और इमानदारी की राह चलकर ,
भ्रष्ट देश के कलंक, को मिटाना होगा !
सत्य के पुजारी बनना ,हर हिन्दुस्तानी है !
मेरे देश की ------------------------------------
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