Wednesday, November 18, 2020

कसडोल से चेतन सिंह की रचना- भ्रष्टाचार

रचनाकार -- चेतन सिंह
पता-------- कसडोल, छत्तीसगढ़
विषय ---- भ्रष्टाचार की राजधानी
शीर्षक --- भ्रष्टाचार
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मेरे   देश  की  , ये   अजब   कहानी   है !
बात    भले    ही  ,     कुछ    पुरानी   है !
कहलाती  थी  कभी , सोने  की चिड़िया , 
पर  आजकल भ्रष्टाचार की राजधानी है !

कितने  मकान ,  कितने    भवन  ढह  गये !
पुल - पुलिया ,बांध, सड़क बाढ़ में बह गये ! 
भला   टिकता  कैसे ,  ये     निर्माण    सब , 
फण्ड तो सारे , भ्रष्टाचार  की भेंट चढ़ गये !
सरकार  की  घोषणा , तो महज़ जुबानी है ! 
मेरे देश की --------------------------------------

खाकी ,   सफेद  हो  , या  कोई  टोपीधारी !
सबका   खून    हो   गया   है     भ्रष्टाचारी !
विकास   की   बातें   तो   होती  है  बाद में , 
पहले   करते    हैं , अपनी    जेबें     भारी !
अधिकारी भी अक्सर करते हैं मनमानी है !
मेरे देश की -------------------------------------

जनता    के  पैसे से , करते   हैं  अय्याशी !
बाबू ,    अधिकारी    हो     या   चपरासी !
रिश्वत  के  पैसे  का , जो  न हुआ इंतजाम , 
कितने   होनहारों   ने ,  लगा   ली  फांसी !
भ्रष्टाचार    में   ये ,   कैसी    कुर्बानी    है !
मेरे देश की ------------------------------------

रिश्वत खोरी ,  भ्रष्टाचार  को भगाना होगा !
देश को फिर से , सोनचिरैया बनाना होगा !
सत्य   और  इमानदारी  की  राह  चलकर ,
भ्रष्ट   देश  के कलंक, को   मिटाना  होगा !
 सत्य के पुजारी बनना ,हर हिन्दुस्तानी है !
मेरे देश की ------------------------------------

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