Wednesday, November 18, 2020

कांकेर से नलिनी बाजपेयी की रचना- भ्रष्टाचार की राजधानी

रचनाकार-नलिनी बाजपेयी
      संबलपुर,जिला-कांकेर,(छ.ग.)
     विषय- भ्रष्टाचार की राजधानी
     
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       *भ्रष्टाचार की राजधानी*

भ्रष्टाचार की राजधानी, 
जिसकी नहीं कोई सानी,
छल,प्रपंच और अपराधों 
की बन गई निशानी।

भ्रष्टाचार बन गया है 
अब नया फैशन,
मन्दिर,मस्जिद, हो या 
कोई रेल्वे स्टेशन।

भ्रष्टाचारियों  की बढ़ गई 
जमात,इनकी करो बखान,
सफेद पोश बने शहर,गाँव 
फिरते बने व्यक्ति महान।

भ्र्ष्टाचार बन गया 
अब यहाँ शिष्टाचार,
सत्य,अहिंसा,प्रेम,सौहार्द्र 
का हो रहा बन्थाधार।

भ्रष्टाचार पर मौन रहो 
कोई मुँह ना खोलो,
चुपचाप बह जाओ उनके 
रौ में कोई कुछ ना बोलो।

लूट खसोट मची है,
मुश्किल हुआ है जीना,
घपलेबाजी और धोखे बाजी 
वाले पी जाते खून पसीना।

*व्याख्या*:- प्रस्तुत कविता में भ्र्ष्टाचार के 
बारे में बताया गया है।भ्रष्टाचार से कैसे 
सारे मायने बदल गए है इसका वर्णन 
किया गया है।

    नलिनी बाजपेयी
संबलपुर,कांकेर,(छ.ग.)

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