पता -------- कसडोल , छत्तीसगढ़
विषय ---- लहरें / प्रवाह
शीर्षक --- जिंदगी
विधा ------ कविता
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उबड़ - खाबड़ डगर - सी है जिंदगी !
कभी गांव , कभी शहर - सी है जिंदगी !
सुख और दुःख के लगते हैं मेले यहां ,
कभी सागर की लहर - सी है जिंदगी !
ये लहरें ग़म के पहाड़ से कहां घबराती है !
संग अपने कभी खुशियां भी बहा लाती है!
कितने कांटे , कितने पत्थर आए राह में ,
सबसे टकराकर आगे बढ़ जाती है !
लहरों की तरह बस बहता चल ,
लगे चाहे , बवंडर - सी है जिंदगी !
कभी आह है , कभी चाह है !
कभी सज़ा है , कभी गुनाह है !
कभी शांत , निश्छल भी है ,
कभी सतत धारा - प्रवाह है !
जिंदगी रूकने का नाम नहीं ,
सुबह , शाम , दोपहर - सी है जिंदगी !
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