Thursday, November 5, 2020

कसडोल से चेतन सिंह की रचना- जिंदगी

रचनाकार -- चेतन सिंह 
पता -------- कसडोल , छत्तीसगढ़
विषय  ---- लहरें / प्रवाह
शीर्षक  --- जिंदगी 
विधा ------ कविता
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उबड़ - खाबड़   डगर - सी  है  जिंदगी !
कभी गांव , कभी शहर - सी है जिंदगी !
सुख और दुःख  के लगते  हैं मेले यहां , 
कभी सागर  की लहर - सी  है जिंदगी !

ये लहरें ग़म के पहाड़ से कहां घबराती है !
संग अपने कभी खुशियां भी बहा लाती है!
कितने  कांटे ,  कितने पत्थर आए राह में ,
सबसे    टकराकर  आगे    बढ़  जाती  है !
लहरों    की     तरह    बस   बहता  चल ,  
लगे   चाहे  ,  बवंडर  -  सी    है   जिंदगी !

कभी     आह   है ,  कभी   चाह  है !
कभी     सज़ा  है ,  कभी  गुनाह  है !
कभी      शांत ,   निश्छल   भी   है ,
कभी   सतत      धारा  -  प्रवाह  है !
जिंदगी      रूकने   का   नाम   नहीं , 
सुबह , शाम , दोपहर - सी है जिंदगी !

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