खैरागढ़,जिला- राजनांदगांव
राज्य -छत्तीसगढ़,
शीर्षक- " छत्तीसगढ़ महतारी"
विधा- गीत (छत्तीसगढ़ी)
(छत्तीसगढ़ महतारी के चरण मा मोर सादर प्रणाम हे)
मोर छत्तीसगढ़ महतारी,
तोर महिमा हवय बड़ भारी।
मोर छत्तीसगढ़ महतारी,
तोर महिमा हवय बड़ भारी।
माथ नवांवव चरण पखारौं,
तैं सबके पालनहारी।
मोर छत्तीसगढ़ महतारी........
तोर भुइयाँ मा कलकल छलछल,
बोहावय नदिया के धार।
तोर कोरा मा अन्नपानी के,
भरे हवय भण्डार।।
तोर अचरा के छइंहा मा दाई,
जिनगी के चलत हे गाड़ी।
मोर छत्तीसगढ़ महतारी......
ये भुइँया सब जीव जंतु के,
घर दुवार हवय डेरा।
तोर मया दुलार के , घरबुंदिया में,
ये जिनगी के घेरा।।
तोर किरपा बरसा दे दाई,
झोली हमर हवय खाली।।
मोर छत्तीसगढ़ महतारी....
इंहा बड़ नदिया,परबत हे,
बन जंगल हे अपार।
सोना हीरा लोहा कोयला के,
रतन भरे भंडार।।
जब सोनहा धान के बाली डोलय ,
लगथे फूल-फुलवारी।।
मोर छत्त्तीसगढ़ महतारी,
तोर महिमा हवय बड़ भारी......
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