Thursday, November 5, 2020

कांकेर से नलिनी बाजपेयी की रचना- लहरें

रचनाकारा-नलिनी बाजपेयी
  संबलपुर,जिला-कांकेर( छ. ग.) 
       विषय :- लहरें,
  दिनाँक :- 04.11.20
~~~~~~~~~~~~~~~

जीवन -सागर में सुख-दुःख 
की लहरें मचल रही,
आसमां को छूने ज्वार भाटा
ज्यौं उड़ान भर रही।

अनकही,अनसुलझी लहरों 
की बातें समझ नहीं आती,
मौन हो इशारों में ही बहुत 
कुछ कह जाती।

दूर-बहुत दूर से 
लहरों की रव है आती,
अपने भीतर के उथल-पुथल 
को जगती को दे जाती।

शोर मचाती जीवन 
सागर की लहरें,
उतार-चढ़ाव की 
कश्तियां भी है मंडराती।

मैं लहरों के बीच तन्हा 
हिचकोलों खाती,
जीवन के तानों बानों में 
उलझ कर हूँ  रह जाती ।

जीवन उलझे ना लहरों ने ही 
किनारा दिखा दिया,
शुक्रगुजार हूँ उस विधाता का 
जिसने जीवन का उपहार दिया।

*व्याख्या*-प्रस्तुत कविता में जीवन रूपी सागर में उठने वाली लहरों से जो उतार-चढ़ाव जीवन में आते है उसका वर्णन किया गया है।
       
       नलिनी बाजपेयी
  संबलपुर,कांकेर,(छ.ग.).

No comments:

Post a Comment

दुर्ग से प्रिया गुप्ता की रचना- चाहत

कवि-प्रिया गुप्ता जिला- दुर्ग राज्य-छत्तीसगढ़ शीर्षक-चाहत विधा-काव्य संपर्क-7974631528  दीवानगी दीवानों की वफ़ा है दोस्तो   काति...