Wednesday, November 4, 2020

कांकेर से मीरा आर्ची चौहान कृत संस्मरण- पुराने पन्नें

रचयिता-मीराआर्ची चौहान
जिला- कांकेर, छग
शीर्षक-पुराने पन्ने
विधा-संस्मरण

दीवाली की सफाई करते  नजरें डायरी के पुराने पन्नों पर ठहर गई,जहां हास्टल जगदलपुर की जूनियर,सीनियर व सहपाठी सहेलियों के आटोग्राफ  थे।ढेर सारी शुभकामनाएं व दुआएं।
सबसे बिखरे पुराने पन्नों में मिल कर आंखे नम हो गई ।
अनायास ही वो दृश्य हाॅस्टल डे का उभर आया,जब हम 150 लड़कियां अपने  रुम को सजातीं व सबके सब साड़ियां पहनतीं।12बजे से फोटो ग्राफी का दौर चलता ,फिर देर रात तक सांस्कृतिक कार्यक्रम ।आज जाने कहां होंगी वो सखियां पर पुराने पन्ने पर लिखी बातें आज भी    जेहन में है ।उन्हें याद कर मन यही कहता है-
जाने कहां गई  वो सखियां,
वो नरगीसी आंखों वाली,
खूबसूरत  नन्हीं परियां,
सपनों के आसमां में भी
इठलाती नहीं दिखती ,
अब जाने किस लोक में  ,
खो गई वो शहजादी  परियां ।।

मीराआार्ची चौहान,
कांकेर,छग
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