Wednesday, November 4, 2020

कांकेर से नलिनी बाजपेयी की रचना- पुराने पन्नें

रचनाकारा-नलिनी बाजपेयी
       संबलपुर,जिला-कांकेर,(छ.ग.)
      विषय :- पुराने पन्ने
    दिनाँक :- 04.11.20
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           *पुराने पन्ने*
बहुत दिनों बाद,
एक डायरी आई हाथ,
हो गए थे पन्ने पुराने,
यादें थी साथ।

देखते ही हर बातें 
ताजा हो गई आज,
संग तेरे बिताएं 
बता रहे थे सब हालात।

रह-रह कर याद आती 
वो सुनहरी यादें,
तुमसे मिलना और 
बिछड़ना सुंदर थे इरादे।

तेरी हर अदा, तेरा 
मुस्कुराना,और इठलाना,
बार-बार तुम्हारी यादों में 
आना और जाना।

तुम्हारा रूठना और मनाना, 
फिर बांहों में छिप जाना,
खतों में सारे किस्से बयाँ 
करती बन अफसाना।

जाने क्यों गमों की 
आँधी आई जिंदगी में,
कागज के पन्ने भरे थे 
करते तुम्हारी बन्दगी में।

तुम्हारे लौट आने की 
उम्मीद तो है नहीं,
बस यही धरोहर है 
जिंदगी में और कुछ नहीं।

*व्याख्या*-प्रस्तुत कविता में पुरानी 
यादों का वर्णन किया गया है।
       नलिनी बाजपेयी
   संबलपुर,कांकेर,( छ.ग.)

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