Thursday, November 5, 2020

दुर्ग से अनुरमा शुक्ला की रचना- लहर

रचनाकार- अनुरमा शुक्ला
स्थान- दुर्ग (छ.ग.)
विधा- कविता
शीर्षक-  लहर 


पल-पल मन में लहरें उठती,          
 जानें कितनी सवाल उफनती
कभी हँसाती, कभी रुलाती,
कण-कण चट्टान तोड़ती भी
परत-परत माटी बनाती भी 
कभी नैया डगमगाती,कभी
सूखे तट की प्यास बुझाती ।

शीत बन जब यह आती,
कितनों पर कहर ढाती,
जल की बूंदे रुकी-रुकी,
साँसे कितनों की थमी-थमी
हड्डियों तक लहर की ठिठुरन
 कोहरे से थमता जीवन,
पड़े फसलों पर ओले की मार
पीड़ा से तड़प उठें किसान
देखी लहर-लहर में भिन्नता
मन का सागर भी शीत हुआ ।।

No comments:

Post a Comment

दुर्ग से प्रिया गुप्ता की रचना- चाहत

कवि-प्रिया गुप्ता जिला- दुर्ग राज्य-छत्तीसगढ़ शीर्षक-चाहत विधा-काव्य संपर्क-7974631528  दीवानगी दीवानों की वफ़ा है दोस्तो   काति...