Monday, November 9, 2020

बलौदाबाजार से लीलाधर कुम्हार की रचना- ज्ञान

रचनाकार - लीलाधर कुम्हार
जिला - बलौदाबाजार ( छ. ग. )
विषय - ज्ञान
विधा - छंद मुक्त कविता
शीर्षक - ज्ञान
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              // ज्ञान //

ज्ञान एक ज्योति है , प्रकाश है ।
मार्ग के मित्र का सच्चा विश्वास है ।।

ज्ञान एक शक्ति है , पॉवर है ।
सारे संसार को सिग्नल देने का एक टॉवर है ।।

ज्ञान एक विश्लेषण है , अनुसंधान है ।
प्रकृति के जटिलताओं का निदान है ।।

ज्ञान एक अनन्त महासागर है ।
मूल्यवान रत्नों से भरा गागर है ।।

ज्ञान एक चेतना है , जागरण है ।
आत्मोन्नति का मूल उपकरण है ।।

ज्ञान प्रेम और अपनत्व का विस्तार है ।
समझ व सुरक्षा का ठेकेदार है ।।

ज्ञान स्वतंत्र है , जीवन का अमृत ।
अनुभूति का स्वाद है , आत्मिक संगीत ।।

ज्ञान ईश्वर की शाश्वत विभूति है ।
सृष्टि के रहस्यों को जानने की युक्ति है ।।

ज्ञान में सर्वोच्च अध्यात्म ज्ञान है ।
जो गुरुगम्य भारतीय वेदान्त है ।।

ज्ञान सूचना और शिक्षा से कहीं ज्यादा है ।
डिग्रियों से परे आंतरिक सुख जगाता है ।।

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