पता --------कसडोल , छत्तीसगढ़
विषय ------ ज्ञान
विधा ------- कविता
शीर्षक ----- शिक्षक और ज्ञान
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विकास की नई इबारतें गढ़ता हूं !
आशाओं के कई जीनें चढ़ता हूं !
उम्मीदों को नए पंख देने ,
बच्चों के मन को पढ़ता हूं !
कोमल मन को हौले से सहलाता हूं !
तब मैं शिक्षक कहलाता हूं !
जुगनू को सूरज बनाना है !
चहुंओर उजियारा फैलाना है !
कर्त्तव्य पथ का मैं राही ,
सबको सद्मार्ग दिखाना है !
बच्चों संग बच्चा बन , मन बहलाता हूं !
तब मैं शिक्षक कहलाता हूं !
पल-पल निरंतर प्रयास का !
आशा और विश्वास का !
मैं प्रतीक हूं , पहचान हूं ,
स्वच्छंद , उन्मुक्त आकाश का !
विद्यार्थी के सपनों को , पर लगाता हूं !
तब मैं शिक्षक कहलाता हूं !
बचपन का कुम्हार हूं मैं !
उन्नति का आधार हूं मैं !
बेशक कलम है गहना मेरा पर ,
अज्ञानता पर प्रहार हूं मैं !
ज्ञान का दीपक हरदम जलाता हूं !
तब मैं शिक्षक कहलाता हूं !
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