Monday, November 9, 2020

महासमुन्द से विनोद कुमार "जोगी" की रचना- ज्ञान

रचनाकार :- विनोद कुमार "जोगी"
जिला :- महासमुंद
विषय :- ज्ञान
विधा :- दोहा छंद
शीर्षक :- जोगी के दोहे

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ज्ञान सरलता देत है, ज्ञान करे मृदु बोल।
ज्ञानी जन देता सदा, उर में मिसरी घोल।।१।।

जलता दीपक ज्ञान है, जग में करे उजास।
ज्ञानी जन होता सदा, नित औरों से खास।।२।।

ज्ञानी तरुवर है घना, देता जग को छांव।
अर्ध ज्ञान उड़ता फिरे, नहीं भूमि पे पांव।।३।।

उच्च ज्ञान सबको मिले, जन - जन का अधिकार।
बुद्धि मिली भगवान से, है अनुपम उपहार।।४।।

ज्ञान मिले तो होत है, जड़ मन भी गुणवान।
ज्ञानी को मिलता सखा, सकल जगत में मान।।५।।

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व्याख्या :- उपरोक्त पंक्तियों में रचनाकार ने संसार में ज्ञान के महत्व का वर्णन किया है, साथ ही ज्ञानी की विभिन्न उपमानों से तुलना करने का प्रयास किया है।

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