जिला :- महासमुंद
विषय :- सफलता
विधा :- मनहरण घनाक्षरी
शीर्षक :- सफलता
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प्रतिपल चले जब,
मेहनत फले तब,
बिन मेहनत कब,
सफलता मिले है।
लक्ष्य एक साध कर,
सतत प्रयास कर,
मन में उमंग भर,
सफलता मिले है।
खयाली पुलाव पका,
बैठें घर हारा - थका,
केवल ही सोचने से,
विफलता मिले है।
तनिक प्रयास नहीं,
कार्य का अभ्यास नहीं,
बिना श्रम किए जोगी,
विफलता मिले है।
भाग - दौड़ छोड़ो सखा,
काबिल बनो हे सखा,
कामयाबी पग चूमे,
सफलता मिले है।
आएगी बाधाएं कई,
उनसे डरना नहीं,
डटकर लड़कर,
सफलता मिले है।
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व्याख्या :- उपरोक्त पंक्तियों में रचनाकार ने सफलता एवं विफलता के कारणों का वर्णन किया है।
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