जिला-कांकेर,छग
विषय-दीपावली
विधा-कविता (मुक्त छंद)
आप सबके घर के मुडेर पर,
दुआओं का एक नन्हा दीया,
मेरी भी शुभकामनाओं का।
शिक्षा का अमिट एक दीया,
अज्ञानता के सघन तिमिर में,
तमसो मा ज्योतिर्गमय का ।
मन के ओसारे में एक दीया,
अंतर के तम को हर ले जो,
अंतस में आत्मचिंतन का।
बुझा न सके जिसे कोई पवन,
आत्मविश्वास की उस बाती से,
मानवता का एक दीप जलाऐं।
मीराआर्ची चौहान
कांकेर,छग
___________
No comments:
Post a Comment