Saturday, November 14, 2020

रायगढ़ से मनोरमा पटनायक की रचना- दीपावली

रचनाकार :- मनोरमा पटनायक 
पता :- तमनार ,रायगढ़ (छत्तीसगढ़ )
 वर्तमान पता :- सम्बलपुर ओड़िशा 
विधा :- कविता (मुक्त छंद )
विषय :- दीपावली 

आप सभी को दीपावली 
की अनंत शुभकामनाएं |
छोड़ पटाखों के प्रदुषण दीपों 
से उजियारा फैलाएं |
मन के अँधेरे दूर कर मानवता को बढ़ाएं |
सबकी ख़ुशी की लिए कामना विश्वास के दीप जलाएं |
जरूरतमंदों और असहायों को मदद के हाथ बढ़ाएं |
छोड़ पटाखों के प्रदुषण दीपों 
से उजियारा फैलाएं |

आज नाश कर पाप राम अयोध्या आये थे |
रावण जैसे महा अधम को परलोक पहुंचाए थे |
अमावश की तिमिर को दीपों की लौ से पूनम बनाये थे |
बुराई जितनी भी हो प्रबल अच्छाई जीते हमेशा सबको यह समझाए थे |
अपने मन में राम नाम की 
संजीवनी लगाएं |
छोड़ पटाखों के प्रदुषण दीपों से 
उजियारा फैलाएं |

आज इस कोरोना की बिमारी 
में सिर्फ हमारा हाथ है |
मानव जाती मुँह छिपाती 
फिरे कैसी अँधेरी रात है |
प्रकृति के विनाश ,और प्रदुषण का ही पाप है |
प्रकृति से बड़े न हम दो 
गज जमीन ही हमारा नाप है |
करेंगे प्यार धरा से अपनी संकल्प यही उठाएं |
छोड़ पटाखों के प्रदुषण दीपों से 
उजियारा फैलाएं |

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