पता :- तमनार ,रायगढ़ (छत्तीसगढ़ )
वर्तमान पता :- सम्बलपुर ओड़िशा
विधा :- कविता (मुक्त छंद )
विषय :- दीपावली
आप सभी को दीपावली
की अनंत शुभकामनाएं |
छोड़ पटाखों के प्रदुषण दीपों
से उजियारा फैलाएं |
मन के अँधेरे दूर कर मानवता को बढ़ाएं |
सबकी ख़ुशी की लिए कामना विश्वास के दीप जलाएं |
जरूरतमंदों और असहायों को मदद के हाथ बढ़ाएं |
छोड़ पटाखों के प्रदुषण दीपों
से उजियारा फैलाएं |
आज नाश कर पाप राम अयोध्या आये थे |
रावण जैसे महा अधम को परलोक पहुंचाए थे |
अमावश की तिमिर को दीपों की लौ से पूनम बनाये थे |
बुराई जितनी भी हो प्रबल अच्छाई जीते हमेशा सबको यह समझाए थे |
अपने मन में राम नाम की
संजीवनी लगाएं |
छोड़ पटाखों के प्रदुषण दीपों से
उजियारा फैलाएं |
आज इस कोरोना की बिमारी
में सिर्फ हमारा हाथ है |
मानव जाती मुँह छिपाती
फिरे कैसी अँधेरी रात है |
प्रकृति के विनाश ,और प्रदुषण का ही पाप है |
प्रकृति से बड़े न हम दो
गज जमीन ही हमारा नाप है |
करेंगे प्यार धरा से अपनी संकल्प यही उठाएं |
छोड़ पटाखों के प्रदुषण दीपों से
उजियारा फैलाएं |
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