Wednesday, November 4, 2020

महासमुन्द से विनोद कुमार "जोगी" की रचना- पुराने पन्ने

रचनाकार :- विनोद कुमार "जोगी"
जिला :- महासमुंद
विषय :- पुराने पन्ने
विधा :- छंद मुक्त कविता

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पलटकर देखो जरा वो पुराने पन्ने,
संजोये जिसमें कुछ रंगीन लम्हें।
रंगीन लम्हें जो मन को लुभाती है,
अतीत को फिर से जीवंत कर जाती है।
कर जाती है खुशियों का पिटारा,
मन करता है जी लें वो लम्हें दुबारा।
दुबारा जीना मगर जोगी नामुमकिन है,
जीवन में कभी खुशियाँ कभी गमगीन है।
गमगीन है अगर जीवन का सफर,
कट जाएगा वो भी गर हो कोई हमसफ़र।
हमसफ़र की जो सुख - दुख को बाँट ले,
पथ में सफर के जो शूलों को छाँट ले।
छाँट ले जो जीवन के सारे उतारों को,
दिला दे हमें जो जीवन के चढ़ावों को।
चढ़ावों को दिला जीवन संवार दे,
खुशियों के खजाने से जीवन में श्रृंगार दे।
श्रृंगार दे जिससे की रौनक ही आ जाए,
जीवन के पन्नों में जरा और रंग पा जाए।
पा जाए कुछ यादगार पन्नें जीवन के सफर पर,
फिर - फिर भविष्य में देखें जिन्हें पलटकर।

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व्याख्या :- उपरोक्त पंक्तियों में रचनाकार ने पुराने पन्ने अर्थात पुरानी यादों का जिक्र किया है। उन्होंने कहा है कि बीते लम्हे बहुत ही रंगीली होती है जिसे सभी फिर से जी लेने की चाहत रखते हैं। मगर यह नामुमकिन है, लेकिन एक अच्छे हमसफ़र का साथ मिलने पर हम अपने वर्तमान के पन्नों को संजो सकते हैं, उन्हें भी यादगार बना सकते हैं।

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