Wednesday, November 4, 2020

ओड़िशा से मोनालिसा बेहरा द्वारा रचित कहानी- पुराने पन्नें

रचियता-मोनालिसा बेहरा
सुंदरगढ़, ओडिशा
विधा-कहानी
विषय-पुराने पन्ने


       आज शिल्पा को नींद नही आ रही थी वह करवट बदलने में ही रात गुजार रही थी क्योंकि उसने आज फेसबुक पे देव को देख लिया था।इतने सालों में उसने कभी उसे सोशल मीडिया में या कहीं भी ढूंढने का प्रयास ही नही किया था।आज की तारीख में वह गलत हो सकती है पर 12 वर्ष पहले ना उसमे सबकुछ छोड़ देव का हाथ थाम आगे बढ़ने की हिम्मत थी और ना किसी का साथ। क्योंकि उसे छोड़ आगे बढ़ने का फैसला उसका अपना था पर अनायास उसका दिख जाना आज उसे अतीत के उन  पुराने पन्नों को पलटने को मजबूर कर रहा था जिसे सालों से उसने अपने सीने में दफन कर रखा था।
                    देव देवदूत के रूप में ही उसके जीवन मे आया था कॉलेज के पहले दिन से ही वह शिल्पा के हर अदा का कायल था और उसके आगे पीछे मंडराता रहता था पर उसकी ये आदतें शिल्पा को बिल्कुल पसंद नहीं थे।देव ने इसकी कभी परवाह नहीं की उसके जीवन का एकमात्र लक्ष्य शिल्पा का हर सम्भव मदद करना ही था क्योंकि वह गांव से आकर कॉलेज में पढ़ रही थी वह नोट्स में और परीक्षा की तैयारियों में उसकी मदद बिना किसी स्वार्थ के करता ।धीरे-धीरे एक साल बीत गया और ना चाहते हुए भी शिल्पा के मन मे उसके लिए प्यार जागने लगा।इस एहसास से वह खुद को बचा नही पाई पर कभी देव से बोल भी नही पाई क्योकि वह जिस परिवार से आई थी वहां प्यार को गुनाह माना जाता था और वह किसी कीमत पर परिवार से खुद को अलग नही करना चाहती थी।उसकी वजह से कोई उसके परिवार पे उंगली उठाए ये उसे मंजूर नही था।पर देव इन सब से बेखबर शिल्पा के सपनों में ही खोया रहता था।
                   जाने कब कॉलेज के 3 साल बीत गए एक रंगीन सपने की तरह और आखिर वो दिन भी आ गया जब सुशांत का रिश्ता आया था शिल्पा के लिए।एक अच्छा लड़का और परिवार पाकर शिल्पा के परिवार वाले बहुत खुश थे और सिर्फ 10 मिनट ही तो दिए थे शिल्पा को उसकी राय के लिए परिवार के सब बड़ो के बीच वह क्या बोलती सब हाँ में सिर हिला दिया।सब इतने खुश थे कि शिल्पा आंसू तक नही बहा पा रही थी।अगले हप्ते सगाई और एक महीने के अंदर शादी की तारीख भी निकाल दी गई। शिल्पा चीख-चीख़ के रोना चाहती थी पर उसके लिए भी एक कोना चाहिए था जो उसे ना मिला।रात भर आंसू बहाती सुबह माँ के पूछने पर मुस्कुरा कर बहाना बना देती।
                       उसने खुद फोन करके देव को अपनी शादी की खबर दी और उसे भूल जाने को कहा पर देव पर तो जैसे दुखो का पहाड़ टूट पड़ा था उसने कई तरह से शिल्पा को शादी तोड़ने को कहा,भाग चलने को कहा,सुशांत से बात करने को कहा पर शिल्पा ने मना कर दिया क्योंकि देव में बचपना था और वह मानसिक रूप से शादी के लिए तैयार नही था लेकिन देव  शिल्पा को किसी सूरत में खोना नही चाहता था क्योंकि वह उससे बहुत प्यार करता था।शिल्पा ने मन के सारे दरवाजे बंद कर लिए थे वह किसी भी कीमत पर माँ-बाप के चेहरे से खुशी छीनना नही चाहती थी।
                शिल्पा प्यार नही निभा पाई , एक अच्छी बेटी बनने की कोशिश में देव का दिल तोड़ दिया पर देव से अधिक आंसू बहाये थे ,देव को शिल्पा से यहां तक कि उसके ख्यालों से भी नफरत हो गई थी।पर शिल्पा आज भी उससे उतना ही प्यार करती है बस जुबान से उसका नाम नही लेती, कहीं उसका जिक्र नही करती बस नम आंखों से अतीत के पन्नों पे स्याही फैलाती रहती है।

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