स्थान---नवापाराखुर्द/सक्ति
जिला---जांजगीर-चाम्पा/ छत्तीसगढ़
विधा---कविता
शीर्षक---मैंना
मैंना
हमर खेत खार म, तैं निश्चिंत रबे रे मैना ।
मन म हांसी फूटही , आंसू नई आवय नैना ।
कोनो मेर बइठे रबे,कोनो मेर उड़त रबे ।
पानी ल पियत रबे,दाना ल चुगत रबे ।
मन लागही तसने, दिन अउ रैना ।
न कोनों छूर कहें,न कोनों दूर कहें ।
न कोनों तोर उपर,नजर लगा के रहें ।
चोबीस घण्टा गूंजत रही तोर बैना ।
न तोला डरना हे,न ठउर ले अपन टरना हे ।
अपन जिनगी के रस्ता म गुजरना हे ।
दखल पावस नहीं अपन तैं चैना ।
गिरधारी लाल चौहान व्याख्याता
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