Monday, November 2, 2020

राजनांदगांव से पद्मा साहू "पर्वणी" की रचना- परिणय बंधन

रचनाकार पद्मा साहू "पर्वणी"
जिला,,,,,राजनांदगांव छ. ग.
विषय,,मुक्त
कविता,,,,, *परिणय बंधन*


जब दो अनजान अपरिचित, आत्माओं का मिलन होता है।
अग्नि को साक्षी मान, वेद मंत्रों का उच्चारण होता है ।
ले सात फेरे सात वचन, बंध जाते हैं परिणय बंधन में ।

दो आत्माओं के साथ-साथ, होता है मिलन दो परिवार का। 
पति पत्नी मिलकर, कर्तव्य निभाते हैं घर संसार का।
दो आत्मा विश्वास की डोरी में बंध, बंध जाते हैं परिणय बंधन में ।

गृहस्ती की गाड़ी के दो पहिए बन, साथ मिलकर चलते हैं । 
दीया और बाती सम, एक दूजे के जीवन में प्रकाश भरते हैं।
नोकझोंक के बीच खुशियाँ लिए, जीवन जीते हैं परिणय बंधन में।
पद्मा साहू *पर्वणी*
खैरागढ़ राजनांदगांव

No comments:

Post a Comment

दुर्ग से प्रिया गुप्ता की रचना- चाहत

कवि-प्रिया गुप्ता जिला- दुर्ग राज्य-छत्तीसगढ़ शीर्षक-चाहत विधा-काव्य संपर्क-7974631528  दीवानगी दीवानों की वफ़ा है दोस्तो   काति...